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अम्बेडकरनगर में अनियमित बारिश और सूखी माइनरों ने बढ़ाई किसानों की चिंता
अम्बेडकरनगर में मानसून की अनियमित बारिश और सिंचाई व्यवस्था की खामियों ने क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। रफीगंज बाजार से आजमगढ़ की ओर जाने वाली शारदा सहायक नहर में पानी छोड़े जाने के बावजूद अधिकांश माइनरों तक पर्याप्त जलापूर्ति नहीं हो रही है। नतीजतन किसान निजी पंपिंग सेट के सहारे खेतों की सिंचाई और धान की रोपाई कराने को मजबूर हैं। इससे खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है।
अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया कि नहर में पानी आने से किसानों को शुरुआत में राहत की उम्मीद जगी थी, लेकिन माइनरों में नियमित और पर्याप्त पानी नहीं पहुंचने से खेत सूखे पड़े हैं। कई जगहों पर सीमित समय के लिए ही पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे अंतिम छोर के किसानों तक सिंचाई का लाभ नहीं पहुंच पा रहा है। इसका सबसे अधिक असर धान की रोपाई पर पड़ रहा है।
किसान रमेश कुमार ने बताया कि सिंचाई के लिए डीजल और बिजली पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि आमदनी पहले जैसी नहीं है। ऐसे में परिवार चलाने के साथ खेती करना भी मुश्किल होता जा रहा है।
किसान सौरभ कुमार ने बताया कि नहर में पानी आने की खबर से उम्मीद थी कि रोपाई समय से पूरी हो जाएगी, लेकिन माइनरों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंचने से किसानों को निजी साधनों पर निर्भर होना पड़ रहा है।
वहीं रमेश, रामप्रताप और सौरभ का कहना है कि नहर विभाग की लापरवाही के कारण अभी तक अधिकांश माइनरों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच सका है। उन्होंने बताया कि पहले एक बीघा खेत की जुताई पर करीब 1,400 रुपये खर्च होते थे, जो अब बढ़कर 1,600 रुपये हो गए हैं। इसी तरह एक बीघा धान की रोपाई का खर्च 2,300 रुपये से बढ़कर 2,500 रुपये पहुंच गया है। किसानों का कहना है कि बढ़ती लागत के बावजूद मौसम की मार और सिंचाई संकट के कारण अपेक्षित उत्पादन नहीं मिल पाता, जिससे आर्थिक संकट और गहरा रहा है।
किसानों ने सिंचाई विभाग से सभी माइनरों में नियमित और पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि समय पर धान की रोपाई पूरी हो सके और बढ़ती लागत से कुछ राहत मिल सके।
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