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VIDEO: 300 वर्ष पुरानी पांडुलिपि संजोए हैं जंगजीत सिंह, कहा- ये राष्ट्र की धरोहर है
कुमारगंज कस्बे के जंगजीत सिंह के पास गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरित मानस की 300 वर्ष पुरानी एक दुर्लभ पांडुलिपि है। यह सांस्कृतिक विरासत अब प्रधानमंत्री संग्रहालय की पहल पर पहचान प्राप्त कर रही है। इस पहल के तहत गांवों और कस्बों में ऐसी धरोहरों को खोजा जा रहा है।
जंगजीत सिंह को यह अमूल्य पांडुलिपि उनके बाबा सुरेंद्र बहादुर से विरासत में मिली थी। वे इसे मखमल के कपड़े में लपेटकर बड़े जतन और सम्मान के साथ रखते हैं। जंगजीत बताते हैं कि उनके बाबा इस पांडुलिपि को सुबह-शाम पढ़ते थे। उनकी माता जी भी इसकी नित्य पूजा करती थीं।
माता जी के बाद इस धरोहर को सहेजने का दायित्व उन्हें मिला। उन्होंने प्रधानमंत्री, राम मंदिर ट्रस्ट और अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय का आभार व्यक्त किया है। कहा कि वर्षों से उनके पास संगृहीत यह पांडुलिपि वास्तव में राष्ट्र की धरोहर है।
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