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बाराबंकी में स्कूलों में 'सांप का साया', सांसत में बच्चों की जान
बाराबंकी में हैदरगढ़ तहसील क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय में शौचालय के पास बैठे जहरीले सांप के डसने से कक्षा तीन के छात्र अंशू की मौत ने सरकारी स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के करीब तीन घंटे बाद परिजनों को सूचना दी गई। आनन-फानन में बच्चे को सीएचसी हैदरगढ़ ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद ग्रामीणों ने विद्यालय में प्रदर्शन कर लापरवाही का आरोप लगाया। मामले की जांच के लिए डीएम ने अपर जिलाधिकारी (न्यायिक), अपर पुलिस अधीक्षक दक्षिणी और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की तीन सदस्यीय समिति गठित की है।
जांच अपनी जगह चल रही है, लेकिन अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया कि बरसात के मौसम में जिले के कई ग्रामीण प्राथमिक विद्यालय अब भी बच्चों के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। कहीं कक्षाओं के आसपास झाड़ियां हैं तो कहीं कबाड़ और कूड़े का अंबार, जो सांपों और अन्य जहरीले जीवों के छिपने के लिए अनुकूल जगह बने हुए हैं।
हरख ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय नानमऊ में हालात और भी चिंताजनक मिले। यहां दो दिन पहले एक कक्षा में खिड़की के पास रखा कालीन उठाते समय सांप दिखाई दिया। सांप कालीन के भीतर घुस गया और तब से वहीं होने की आशंका है। विद्यालय की शिक्षिका ने वह कालीन दिखाते हुए बताया कि डर के कारण उस कक्षा में बच्चों को बैठाना बंद कर दिया गया है। मौके पर मौजूद ग्राम पंचायत की सफाईकर्मी ने भी माना कि कालीन में सांप हो सकता है, इसलिए वह उसे हटाने का जोखिम नहीं उठा सकती।
प्राथमिक विद्यालय बड़ापुरा में स्कूल परिसर की घास काटने और सफाई का काम चलता मिला, जो राहत की बात रही। हालांकि परिसर में जंग लगा कूड़ादान औंधे मुंह पड़ा मिला और कूड़े का वैज्ञानिक निस्तारण करने के बजाय उसे खुले में जलाया जा रहा था। इससे साफ है कि कई विद्यालयों में नियमित और व्यवस्थित सफाई व्यवस्था अब भी नहीं बन सकी है।
बरसात के मौसम में झाड़ियां, जलभराव, कबाड़ और अनुपयोगी सामान सांपों का सुरक्षित ठिकाना बन जाते हैं। ऐसे में विशेषज्ञ भी स्कूल परिसरों की नियमित सफाई, झाड़ियों की कटाई, कबाड़ हटाने और बच्चों के बैठने वाले कमरों की रोजाना जांच कराने की सलाह देते हैं। देवघर की घटना के बाद यह व्यवस्था कितनी प्रभावी ढंग से लागू होती है, इस पर अब सभी की नजर है।
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