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VIDEO: लोधेश्वर महादेव की कृपा से चमत्कारी अनुभव: कांवड़ियों की आस्था और विश्वास की अनूठी कहानियां
लोधेश्वर महादेव के दरबार में कांवड़ चढ़ाने आए दूर-दराज के जिलों के कांवड़ियों के अनुभवों में आस्था और अटूट विश्वास की कई मार्मिक कहानियां सुनने को मिल रही हैं। फतेहपुर जिले के खाका तहसील क्षेत्र से 200 कांवड़ियों के जत्थे के साथ लोधेश्वर महादेव पहुंचने वाले चंद्रपाल सिंह यादव की व्यथा-कथा किसी चमत्कार से कम नहीं है। हैदरगढ़ रोड, कोठी, जैदपुर होते हुए सफदरगंज के रास्ते महादेवा की ओर बढ़ रहे इस जत्थे से संवाददाता की मुलाकात शिवालापुरवा और बीबीपुर गांवों के बीच हुई।
दुर्घटना से उबरकर आस्था की ओर
जब चंद्रपाल से लोधेश्वर महादेव के प्रति उनकी गहरी आस्था का कारण पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के दौरान वह एक गंभीर दुर्घटना का शिकार हो गए थे। कानपुर के एक अस्पताल में उन्हें 11 दिन तक आईसीयू में भर्ती रहना पड़ा। उस समय हर कोई उन्हें यह कह रहा था कि वे शायद चलने लायक भी नहीं बचेंगे। लेकिन अस्पताल में भर्ती रहते हुए, चंद्रपाल ने लोधेश्वर महादेव का स्मरण करते हुए मन्नत मांगी थी कि यदि वे ठीक हुए तो कांवड़ लेकर उनके द्वार अवश्य आएंगे। चंद्रपाल का मानना है कि लोधेश्वर महादेव की कृपा से ही वे आज दूसरे साल भी कांवड़ लेकर आ पा रहे हैं और उन्हें उस दुर्घटना का कोई निशान महसूस नहीं होता।
चंद्रपाल के अलावा, जत्थे में शामिल बछन सिंह, राम सुरेश और विजय सिंह जैसे अन्य कांवड़ियों ने भी अपनी मनौतियां पूरी होने की खुशी व्यक्त की। इसी प्रकार, जिला मुख्यालय पर जालौन जिले का एक कांवड़ियों का जत्था भी अपनी कांवड़ यात्रा पर दिखा, जिसमें लगभग ढाई सौ लोग शामिल थे। ये सभी अनुभव दर्शाते हैं कि कैसे आस्था और विश्वास कठिन परिस्थितियों में भी लोगों को शक्ति प्रदान करते हैं और लोधेश्वर महादेव का दरबार भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करने का माध्यम बनता है। इन कांवड़ियों की कहानियां न केवल उनकी व्यक्तिगत श्रद्धा को दर्शाती हैं, बल्कि समाज में सकारात्मकता और प्रेरणा का संचार भी करती हैं।
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