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Gorella-Pendra-Marwahi News: बेंगलुरू खदान हादसे में मरवाही के युवक की मौत, परिजनों का रो रोकर बुरा हाल
अमर उजाला नेटवर्क, जीपीएम Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 03 Jul 2026 10:20 AM IST
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कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के दक्षिण जिले के मदपट्टना स्थित एक पत्थर खदान में गुरुवार को हुए दर्दनाक हादसे में सात मजदूरों की मौत हो गई। मृतकों में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिले के मरवाही विकासखंड के पंडरी गांव निवासी 28 वर्षीय धर्मेश सिंह मार्को भी शामिल हैं।
हादसे की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया, जबकि पूरे गांव में शोक का माहौल है। परिजनों ने शासन-प्रशासन से धर्मेश का पार्थिव शरीर उनके गृहग्राम पंडरी तक सुरक्षित पहुंचाने की मांग की है, ताकि अंतिम दर्शन के बाद उनका विधिवत अंतिम संस्कार किया जा सके।
जानकारी के अनुसार, मदपट्टना स्थित स्टोन क्रशर खदान में गुरुवार को 15 से 20 मजदूर काम कर रहे थे। इसी दौरान खदान के ऊपरी हिस्से में क्रेन और हिताची एक्सकेवेटर की मदद से सफाई का कार्य चल रहा था। अचानक लगभग 40 फीट ऊंचाई से एक विशाल चट्टान नीचे काम कर रहे मजदूरों पर आ गिरी। हादसा इतना भीषण था कि सात मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को उपचार के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस और बचाव दल ने तत्काल मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। मलबे के नीचे अन्य मजदूरों के फंसे होने की आशंका को देखते हुए अभियान देर तक जारी रहा।
धर्मेश सिंह मार्को पिछले करीब पांच वर्षों से बेंगलुरु में मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। वे होली के अवसर पर कुछ दिनों के लिए अपने गांव आए थे और परिवार से यह कहकर वापस लौटे थे कि इस बार अच्छी कमाई कर घर बनाएंगे और फिर शादी करेंगे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
हादसे की जानकारी धर्मेश के साथ काम करने वाले साथियों ने फोन पर उनके परिजनों को दी। सूचना मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। गांव के लोगों ने भी शोक व्यक्त करते हुए शासन से मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता और परिजनों को हरसंभव सहयोग देने की मांग की है। वहीं स्थानीय पुलिस ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, खदान में कार्य के दौरान ऊपरी हिस्से से भारी चट्टान खिसकने के कारण यह हादसा हुआ। फिलहाल परिजनों को धर्मेश के शव का इंतजार है कि शव को सुरक्षित उसके गृह ग्राम तक पहुच जाए और उसका अंतिम संस्कार किया जा सके।
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