Hindi News
›
Video
›
Haryana
›
Bhiwani News
›
Remains of the Harappan-era Indus Valley Civilization have been found at five locations in Bhiwani district; the heritage is now in danger.
{"_id":"6a75ca9f69f56ddd530ec99a","slug":"video-remains-of-the-harappan-era-indus-valley-civilization-have-been-found-at-five-locations-in-bhiwani-district-the-heritage-is-now-in-danger-2026-08-07","type":"video","status":"publish","title_hn":"भिवानी: जिले में पांच जगह मिल चुके हैं हड़प्पा कालीन सिंधु घाटी मानव सभ्यता के अवशेष, अब संकट में धरोहर, पुरातत्व विभाग की उपेक्षा की वजह से नहीं हुआ सरंक्षण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भिवानी: जिले में पांच जगह मिल चुके हैं हड़प्पा कालीन सिंधु घाटी मानव सभ्यता के अवशेष, अब संकट में धरोहर, पुरातत्व विभाग की उपेक्षा की वजह से नहीं हुआ सरंक्षण
भिवानी जिले में पांच ऐसी ऐतिहासिक जगह चिह्नित हैं, जहां हड़प्पा कालीन सिंधु घाटी मानव सभ्यता से जुड़े व्यापक अवशेष मिल चुके हैं। इसमें तोशाम क्षेत्र के गांव खानक, मानहेरू, नौरंगाबाद, मिताथल, तिगड़ाना शामिल हैं। वर्तमान में नौरंगाबाद के खेड़े को छोड़कर बाकी जगहों पर पुरातत्व विभाग की उपेक्षा के चलते हडप्पा कालीन धरोहर संकट में आ चुकी हैं। जिनके संरक्षण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। हालत यह है कि मानहेरू और खानक में तो हड़प्पा कालीन सभ्यता से जुड़ा अब कोई निशान बाकी नहीं बचा है। जबकि मिताथल का हड़प्पा कालीन टीला भी अब लगातार अतिक्रमण की वजह से सिकुड़ रहा है। गांव तिगड़ाना का टीला तो धूल में मिल खेतों में समतल होकर फसल उत्पादन का हिस्सा बन चुका है।
जिले के गांव मानहेरू में दिल्ली व एमडीयू यूनिवर्सिटियों की संयुक्त रिसर्च 2009 में की गई थी। तोशाम क्षेत्र के खानक में प्रोफेसर आर.एन सिंह के नेतृत्व में बनारस यूनिवर्सिटी की पुरातत्व टीम 2016 में खुदाई कर हड़प्पा कालीन सभ्यता खोज कर चुकी है। वहीं हरियाणा केन्द्रीय विश्वविद्यालय पाली महेंद्रगढ़ पुरातत्व विभाग के तत्कालीन निदेशक डॉ. नरेंद्र परमार की अगुवाई में मई 2016 में तिगड़ाना के करीब 25 एकड़ क्षेत्रफल में फैले ऐतिहासिक खेड़ा की खुदाई की गई थी। यहां पर हड़प्पा कालीन सभ्यता से जुड़े काफी ऐतिहासिक वस्तुएं मिली थी, जिसकी रिपोर्ट को भी पुरातत्व विभाग ने व्यापक शोध कार्य की कसौटी पर खरा उतरने के बाद सार्वजनिक किया था। गांव नौरंगाबाद का खेड़ा पर 2001 में यौध्य (कुषाण) सभ्यता के अवशेष मिल चुके हैं। गांव नौरंगाबाद में भी खेड़ा पर पुरातत्व विभाग मानव सभ्यता से जुड़ी वस्तुओं को खोज चुके हैं। गांव मिताथल में 1968 में कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के प्रो. सुरजभान हड़प्पा कालीन अवशेषों की खोज कर चुके हैं। लेकिन वर्तमान में इन प्राचीन मानव सभ्यता से जुड़ी धरोहरों की हालत ठीक नहीं हैं, जहां अधिकारियों के संरक्षण के प्रयास भी नाकाफी साबित हो रहे हैं।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।