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The Animal Husbandry Department has geared up to make Bhiwani a foot-and-mouth disease-free district.
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भिवानी को मुंहखुर-गलघोटू मुक्त जिला बनाने के लिए पशुपालन विभाग ने कसी कमर
पशुपालकों की आर्थिक उन्नति और पशुधन के बेहतर स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए पशुपालन विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। जिसके तहत मुंहखुर और गलघोटू बीमारी के खिलाफ आगामी टीकाकरण अभियान को गति देने की तैयारियां शुरू हो चुकी है। वही पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डा. रविंद्र सहरावत ने स्पष्ट संदेश दिया कि इस बार जिले का कोई भी पशु टीकाकरण से वंचित नहीं रहना चाहिए। मई के प्रथम सप्ताह से शुरू होने वाले इस विशेष अभियान के तहत भिवानी जिले के 2 लाख 83 हजार पशुओं को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है। इस बारे में पशु चिकित्सक विजय सनसनवाल ने बताया कि पूरे देश में केवल हरियाणा ही ऐसा राज्य है जहां मुंहखुर और गलघोटू की संयुक्त वैक्सीन लगाई जाती है। अन्य राज्यों में इन दोनों गंभीर बीमारियों के लिए अलग-अलग टीके लगाए जाते हैं। यह संयुक्त वैक्सीन न केवल प्रभावी है, बल्कि पशुओं को बार-बार के तनाव से भी बचाती है। उन्होंने कहा कि मुंहखुर बीमारी से पशु का दूध पूरी तरह सूख जाता है, जिससे किसान को भारी आर्थिक नुकसान होता है। वही गलघोटू यह एक जानलेवा बीमारी है जिसमें पशु को सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई होती है। अक्सर किसानों में डर रहता है कि वैक्सीन से पशु का दूध कम हो जाता है या गर्भपात हो जाता है। इस पर पशु चिकित्सक विजय सनसनवाल ने स्पष्ट किया कि ये केवल अफवाहें हैं। टीकाकरण पूरी तरह सुरक्षित है। यदि टीका लगने के बाद पशु को हल्का बुखार आता है, तो उसे दो दिन बुखार की सामान्य गोलियां और भिगोया हुआ गुड़ दिया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस बार टीकाकरण के साथ-साथ पारदर्शिता पर भी जोर दिया जाएगा। प्रत्येक पशु के कान में टैग लगाया जाएगा और उसकी पूरी जानकारी भारत पशुधन ऐप पर तुरंत अपलोड की जाएगी। इससे पशुओं की सेहत का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा। उन्होंने कहा कि इस वैक्सीनेशन का तापमान भी दो से 8 डिग्री सेंटीग्रेड तक रखा जाता है। उन्होंने बताया कि वैक्सीन के तापमान का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा।
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