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Fast food fried in old oil in Kaithal is taking a toll on health, leading to a rise in diarrhea cases among children.
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कैथल में पुराने तेल में तला फास्ट फूड बिगाड़ रहा सेहत, बच्चों में बढ़ रही डायरिया की बीमारी
मौसम में बदलाव और अस्वच्छ खानपान के कारण इन दिनों फूड प्वाइजनिंग और डायरिया के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। खासकर बाजार में मिलने वाले फास्ट फूड और तले-भुने खाद्य पदार्थ लोगों की सेहत पर बुरा असर डाल रहे हैं। जिला नागरिक अस्पताल में भी इन दिनों पेट से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल अग्रवाल ने बताया कि मौसम में बदलाव के दौरान बैक्टीरिया और संक्रमण तेजी से फैलते हैं जिससे फूड प्वाइजनिंग और डायरिया की समस्या बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि ओपीडी में डायरिया से संबंधित लक्षणों के 70 मरीज आ रहें हैं। इनमें बच्चों की संख्या अधिक देखने को मिल रही है। डॉ. अग्रवाल ने बताया कि बाजार में मिलने वाले फास्ट फूड की गुणवत्ता कई बार ठीक नहीं होती। दुकानदार एक ही तेल को बार-बार गर्म करके उसमें समोसे, पकौड़े और अन्य खाद्य पदार्थ तलते रहते हैं। पुराने तेल का बार-बार उपयोग करने से उसमें हानिकारक तत्व पैदा हो जाते हैं जो शरीर के लिए नुकसानदायक होते हैं। ऐसे भोजन का सेवन करने से उल्टी, दस्त, पेट दर्द और कमजोरी जैसी समस्याएं हो जाती हैं ।
उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों और बुजुर्गों में डायरिया जल्दी गंभीर रूप लेता है इसलिए खानपान का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। समय पर इलाज न मिले तो शरीर में पानी और लवण की कमी भी हो सकती है जिससे स्थिति बिगड़ सकती है। उन्होंने बताया कि डायरिया होने पर मरीज को ओआरएस घोल, नींबू पानी, नारियल पानी और अन्य तरल पदार्थ देते रहना चाहिए। ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। यदि दस्त लगातार जारी रहें उल्टी अधिक हो या मरीज में कमजोरी महसूस हो तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि साफ-सफाई और संतुलित खानपान अपनाकर फूड प्वाइजनिंग और डायरिया जैसी बीमारियों से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है।
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