केन–बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में चल रहे आंदोलन के दौरान धारा 151 में गिरफ्तार किए गए सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर के 4 दिन बाद रिहा होने के बाद अगले दिन शुक्रवार को सीधे प्रभावित गांवों में पहुंचे। उन्होंने आदिवासी महिलाओं और प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को सुना तथा सामूहिक रूप से एक विस्तृत मांगपत्र तैयार किया। प्रभावितों की मांग माने जाने व अमित भटनागर के रिहाई की खुशी में प्रभावितों ने जोरदार नारेबाजी कर जश्न भी बनाया।
ज्ञात हो कि हालिया घटनाक्रम में आंदोलन के दौरान कई ग्रामीण और महिलाएं घायल हुईं, जिन पर कथित रूप से पुलिस द्वारा बल प्रयोग किया गया। इस संबंध में घायल महिलाओं की स्थिति और कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी कल जिला कलेक्टर के समक्ष औपचारिक रूप से रखा जाएगा।
आज शनिवार जिला कलेक्टर के साथ दोपहर 12 बजे अमित भटनागर के नेतृत्व में पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल वार्ता करेगा। प्रतिनिधिमंडल प्रभावितों की मांगों, कानून के पालन तथा पारदर्शिता के साथ परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा, ग्राम सभा, पुनः सर्वे, प्रभावितों के प्रभावितों की पुनर्वास नीति, 5 एकड़ जमीन आदि मुद्दों विस्तृत चर्चा करेगा।
पढ़ें: उज्जैन में तेज रफ्तार गेहूं से भरे ट्राले ने बुजुर्ग को कुचला, मौके पर मौत; हाईवे पर लगा जाम
इस बीच जिला कलेक्टर ने सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट किया है कि प्रशासन संवाद के लिए तैयार है और ग्राम सभाएं पुनः पारदर्शी तरीके से आयोजित की जाएंगी। साथ ही सर्वे की प्रक्रिया कानूनसम्मत ढंग से आगे बढ़ाई जाएगी। कलेक्टर के इस बयान से प्रभावितों और प्रशासन के बीच एक सकारात्मक वातावरण बनता दिखाई दे रहा है।
अमित भटनागर की रिहाई और प्रशासन की इस पहल के बाद कई गांवों में लोगों ने संयमित तरीके से संतोष व्यक्त किया। हालांकि प्रभावितों का कहना है कि वे प्रशासन के आश्वासनों का स्वागत करते हैं, लेकिन वास्तविक विश्वास तभी बनेगा जब घोषणाएं जमीन पर लागू होती दिखाई देंगी।
अमित भटनागर ने कहा कि यह संघर्ष किसी व्यक्ति का नहीं बल्कि आदिवासी महिलाओं, ग्रामीणों और उनके अधिकारों का है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन पारदर्शिता और कानून के अनुरूप प्रक्रिया अपनाता है तो आंदोलन सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ेगा, लेकिन यदि वादों और वास्तविकता में अंतर पाया गया तो प्रभावित पुनः लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने को बाध्य होंगे। फिलहाल सभी की निगाहें कल होने वाली वार्ता पर टिकी हैं, जिसे आंदोलन के भविष्य की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।