रायसेन जिले के सिलवानी वन परिक्षेत्र में सागौन के बेशकीमती पेड़ों की अवैध कटाई और वन विभाग की कार्यशैली को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ग्राम खेरी, जमुनिया और चौका में सैकड़ों की संख्या में सागौन के पेड़ काटे जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि वन विभाग के कुछ अधिकारियों ने लकड़ी माफियाओं से मिलीभगत कर करोड़ों रुपए के सागौन के पेड़ों की कटाई करवाई और बाद में शिकायत करने वाले युवक को ही आरोपी बनाकर जेल भेज दिया।
मामले में ग्राम खेरी निवासी आजाद खान पिता मुन्ना खान ने जंगल कटाई की शिकायत उच्च अधिकारियों से की थी। बताया जा रहा है कि उन्होंने इस संबंध में मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) से संपर्क कर जानकारी दी थी और मीडिया को भी मौके की जानकारी दी थी। आरोप है कि शिकायत के बाद वन विभाग ने कार्रवाई करने के बजाय आजाद खान को ही मुख्य आरोपी बनाते हुए उसके साथ मारपीट की और जेल भेज दिया।
स्थानीय लोगों के अनुसार सिलवानी क्षेत्र के खमरिया, चौका और जमुनिया बीट में लंबे समय से अवैध कटाई चल रही थी। ग्रामीणों का कहना है कि रात के अंधेरे में सागौन के पेड़ काटकर ट्रकों के माध्यम से बाहर भेजे जाते रहे। इस पूरे मामले में करोड़ों रुपए के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। जब मामला मीडिया में उछला तो वन विभाग के अधिकारी जवाब देने से बचते नजर आए।
मीडिया द्वारा जब इस संबंध में जिला वन अधिकारी (डीएफओ) प्रतिभा शुक्ला से पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो पहले उन्होंने नाराजगी जताई, बाद में जांच दल गठित कर कार्रवाई का आश्वासन दिया। हालांकि, आरोप है कि कुछ ही समय बाद शिकायतकर्ता को ही आरोपी बना दिया गया और उस पर सख्त कार्रवाई कर दी गई।
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इस बीच मुख्य वन संरक्षक क्षितिज कुमार के रायसेन पहुंचने पर मीडिया ने सवाल किए। उन्होंने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाते हुए कहा कि यदि कोई दोषी पाया गया तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि जब से डीएफओ के रूप में प्रतिभा शुक्ला ने पदभार संभाला है, तब से क्षेत्र में अवैध उत्खनन और जंगल कटाई की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है।
शिकायतकर्ता के पिता ने आरोप लगाया है कि वनकर्मी उनके घर में घुसे, सामान अस्त-व्यस्त किया और जरूरी दस्तावेज साथ ले गए। उन्होंने अपने बेटे को निर्दोष बताते हुए न्याय की गुहार लगाई है। अब सवाल यह है कि क्या वन विभाग निष्पक्ष जांच कर वास्तविक दोषियों पर कार्रवाई करेगा या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह दबा दिया जाएगा। फिलहाल पूरे जिले में इस प्रकरण को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है और सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।