टीकमगढ़ जिले के बल्देवगढ़ नगर में भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां पर एसडीएम कार्यालय में जमीन पर स्टे के लिए पहुंची महिला तो उसे रिश्वत मांगी गई। जब महिला ने देने से मना कर दिया तो उसे स्टे नहीं दिया गया और दबंग लगातार उसकी जमीन पर कब्जा कर रहे हैं। रिश्वत के रूप में वह गाय को लेकर गुरुवार को एसडीएम कार्यालय पहुंची।
पीड़ित महिला रामकुंवर लोधी ने बताया कि वह केलपुरा गांव की रहने वाली है और उसकी जमीन पर गांव के ही दबंग प्रमोद द्वारा कब्जा किया जा रहा है। इसकी शिकायत वह थाने लेकर पहुंची थी तो थाने वालों ने कहा कि आप एसडीएम कार्यालय से स्टे ले लीजिए। लेकिन वह पिछले आठ दिन से लगातार एसडीएम कार्यालय के चक्कर लगा रही है।
वहीं, एसडीएम के बाबू स्टे के लिए 50,000 रिश्वत की मांग कर रहे हैं। जो देने में सक्षम नहीं है। उसने कहा कि वह तहसीलदार और एसडीएम को कई बार आवेदन दे चुकी है। लेकिन उसे स्टे नहीं दिया जा रहा है। क्योंकि जमीन पर कब्जा करने वाले प्रमोद दबंग व्यक्ति हैं और सत्ता से जुड़े हुए हैं। लेकिन उस गरीब महिला की सुनने वाला कोई नहीं है। आखिरकार यह महिला रिश्वत के तौर पर गाय को लेकर एसडीएम कार्यालय पहुंची।
रिश्वत के लिए गाय लेकर पहुंची एसडीम कार्यालय
गुरुवार दोपहर एसडीएम कार्यालय बल्देवगढ़ महिला गाय को अपने साथ में लेकर पहुंची। उसका कहना है कि उसके पास इतने रुपये नहीं है कि वह अपनी जमीन पर अवैध निर्माण के स्टे के लिए पैसे दे सके। उसका सीधा आरोप है कि यहां के बाबू द्वारा रिश्वत मांगी जा रही है। जब वह गाय लेकर एसडीएम कार्यालय पहुंची तो देखने वाले दंग रह गए और उसने तहसीलदार की जीप के सामने गाय को बांध दिया।
साथ ही कहा कि अगर स्टे नहीं मिला तो वह आग लगाकर आत्महत्या कर लेगी। इस घटना से स्पष्ट हो जाता है कि ग्रामीण अंचलों में मध्यप्रदेश सरकार भले ही दावा कर ले कि राजस्व विभाग में रिश्वत नहीं चल रही है। लेकिन टीकमगढ़ में भ्रष्टाचार का खेल खुलेआम चल रहा है, जिसकी यह एक बानगी है। ऐसा नहीं है कि टीकमगढ़ जिले के कलेक्टर या अधिकारियों की उसकी जानकारी नहीं है।
इस मामले को लेकर जब बल्देवगढ़ एसडीएम भारती मिश्रा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मैं टीकमगढ़ कलेक्ट्रेट में एक बैठक में आई हूं और मुझे इस घटना की कोई जानकारी नहीं है। जबकि यह महिला पिछले आठ दिन से स्टे के लिए एसडीएम के चक्कर लगा रही है। यानी कि वह सब जानते हुए अनजान बनी है।
दो घंटे में अपने बयान से पलटी बल्देवगढ़ एसडीएम
टीकमगढ़ के बल्देवगढ़ तहसील के अंतर्गत आने वाले केलपूरा गांव की रहने वाली रामकुंवर लोधी गुरुवार की दोपहर रिश्वत के रूप में गाय को लेकर एसडीएम कार्यालय में पहुंची थी। क्योंकि उसकी जमीन पर दबंग कब्जा कर रहे हैं और पिछले आठ दिन से वह स्टे के लिए एसडीएम कार्यालय के चक्कर लगा रही है। एसडीएम के बाबू उससे स्टे के लिए 50,000 मांग रहे थे।
आखिरकार जब महिला की हिम्मत टूट गई तो उस गरीब महिला ने गुरुवार की दोपहर रिश्वत के रूप में गाय को लेकर एसडीएम कार्यालय पहुंची और एसडीएम कार्यालय के बाहर गाय को बांध दिया। इस संबंध में जब शाम को बात की गई तो उनका कहना था कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। वह मीटिंग में टीकमगढ़ कलेक्ट्रेट में हैं। इसके बाद जैसे ही मीडिया की खबरें सुर्खियां बनी तो तुरंत एसडीएम ने करीब आठ बजे के आसपास एक वीडियो संदेश सोशल मीडिया पर जारी किया है और कहा है कि उसका स्थगन आदेश पहले से है। इसलिए द्वारा स्थगन आदेश नहीं दिया जा सकता है। सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है कि आखिरकार जब एसडीएम से शाम करीब पांच के आसपास बात की गई तो की गई थी तो उनका कहना था कि इस तरह का मामला उनके संज्ञान में नहीं है और वह मीटिंग के लिए टीकमगढ़ कलेक्ट्रेट में आई हुई हैं।

एसडीएम भारती मिश्रा
दो घंटे में बदला अपना बयान
बल्देवगढ़ की एसडीएम भारती मिश्रा ने दो घंटे के अंदर अपना बयान पलट लिया है। शाम को जब उनसे दूरभाष पर बात की गई थी तो उनका कहना था कि उनके संज्ञान में इस तरह का कोई मामला नहीं है। जबकि महिला पिछले आठ दिन से उनके ऑफिस की चक्कर लगा रही थी। इसके बाद जब यह खबर मीडिया की सुर्खियां बनी तो उन्होंने वीडियो संदेश जारी कर दिया और कहा कि इसमें स्थगन आदेश पहले से है। इसलिए द्वारा स्थगन आदेश नहीं दिया जा सकता है।
सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है कि अगर स्थगन आदेश था तो पिछले आठ दिन से गांव का दबंग कैसे निर्माण कर रहा है। क्या एसडीएम का दायित्व नहीं था कि उसे निर्माण कार्य को रुकवाकर आखिरकार उस पीड़ित महिला को न्याय दिला सके। एसडीएम कार्यालय के चक्कर लगाने पड़े और अंत में हार करके उसे अपनी रिश्वत के रूप में गाय एसडीएम के बाबू को भेंट करने के लिए कार्यालय पहुंची।