बूंदी सदर थाना क्षेत्र में रविवार देर रात रामगंज बालाजी नेशनल हाइवे स्थित वेलकम होटल में पैसे की लेनदेन को लेकर हुए विवाद में होटल कर्मियों द्वारा फाइनेंसकर्मी की हत्या मामले में पुलिस ने त्वरित प्रभाव से हत्या के आरोपियों को गिरफ्तार कर शहर में जुलूस निकाला। वहीं, दूसरी ओर तहसीलदार ने रामगंज बालाजी स्थित होटल वेलकम की पैमाइश कर उपखंड अधिकारी को रिपोर्ट सौंपी है।
जन विरोध के बावजूद लगातार बढ़ रही अवैध और अनैतिक गतिविधियों के बीच फाइनेंसकर्मी की हत्या से नाराज ग्रामीणों ने सरपंच के नेतृत्व में होटल को सीज करने की मांग करते हुए जिला कलेक्टर बूंदी को ज्ञापन सौंपा था। वहीं, बूंदी विधायक हरिमोहन शर्मा ने राजस्थान विधानसभा में वेलकम होटल हत्याकांड का मामला उठाते हुए आरोपियों सहित होटल व्यवसायी को संरक्षण देने वालों पर भी कार्रवाई की मांग की थी।
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पुलिस कप्तान राजेंद्र कुमार मीणा के निर्देशन में सदर थाना पुलिस ने हत्याकांड का त्वरित खुलासा करते हुए हत्या में लिप्त होटल संचालक बनवारी सहित चार अन्य होटलकर्मियों को गिरफ्तार किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी आरोपियों को तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। कार्रवाई के दौरान डीवाईएसपी अरुण कुमार, सदर थाना अधिकारी रमेश चंद्र आर्य मय पुलिस जाब्ता मौजूद रहे।
राष्ट्रीय राजमार्ग 52 की सीमा और सरकारी भूमि पर निर्मित है होटल
पुलिस की कार्यप्रणाली और होटलों में चल रही अवैध गतिविधियों को लेकर स्थानीय ग्रामीणों के आक्रोश और होटल को हटाने की मांग पर उपखंड अधिकारी के निर्देश पर तहसीलदार ने मौका निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करवाई। तहसीलदार द्वारा उपखंड अधिकारी को सौंपी गई रिपोर्ट में होटल वेलकम के बिना भू उपयोग परिवर्तन कृषि भूमि पर संचालित होने और आसपास की सरकारी जगह व सरकारी नाले अतिक्रमण करने की पुष्टि हुई है।
तहसीलदार द्वारा उपखंड अधिकारी को सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार, उक्त भूमि शामलाती खातेदारी में दर्ज रिकॉर्ड के अनुसार होटल वेलकम के मालिक बनवारी की पत्नी किरण बैरवा निवासी झुवासा तहसील के. पाटन के नाम खातेदारी में दर्ज है। रिपोर्ट के अनुसार, जिस स्थान पर वर्तमान में होटल वेलकम स्थित है, उसका आगे का कुछ हिस्सा एनएच-52 की सीमा 30 मीटर छोडने के पश्चात आता है, जिसमें पक्का निर्माण सीढ़ियां आदि आती हैं।
इसी प्रकार होटल के पीछे का हिस्सा जो पश्चिम दिशा में है, उसका कुछ हिस्सा सिवायचक है। जो कि सरकारी नाला है। इस पर वर्तमान में पक्का निर्माण दो मंजिला होटल बनी हुई है। वहीं, शेष भूमि कृषि भूमि के रूप मे दर्ज है। वहीं, रिपोर्ट के अनुसार भूमि का रूपान्तरण होटल प्रयोजनार्थ नहीं पाया गया है तथा सरकारी नाले के ऊपर बजी अतिक्रमण कर निर्माण करना पाया गया है। अब देखने वाली बात यह है कि रिपोर्ट आने के बाद जिला कलेक्टर अवैध अतिक्रमण को धराशाई करने की अनुमति कब देते हैं।
प्रदेश में पहली बार मकान सीज करने वाली फाइनेंस कंपनी यूटर्न
प्रदेश में पहली बार एक फाइनेंस कंपनी को मकान सीज करने की कार्रवाई करने के दो दिन बाद बैकफुट पर आकर बुधवार को बूंदी में मजबूर होकर खुद अपनी ही सिजिंग की सील तोड़नी पड़ी है। बूंदी रेलवे स्टेशन के सामने श्रीराम कॉलोनी में सोमवार को फाइनेंस कम्पनी ने लोन लेने वाले की अनुपस्थिति में परिवार की महिलाओं व बच्चों को जबरन बाहर निकालकर मकान सीज कर दिया था। इस दौरान मकान में रहने वाले परिवार के खाने-पीने सहित सभी सामान यहां तक कि दसवीं में अध्ययनरत दो छात्राओं के दसवीं बोर्ड परीक्षा के प्रवेश पत्र भी भीतर ही रह गए थे।
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मानवाधिकार आयोग में केस दर्ज करवाने की चेतावनी दी थी
पीड़ित परिवार ने सीज किए हुए मकान से छात्राओं के बोर्ड परीक्षा के प्रवेश पत्र दिलवाने और खाने पीने के आवश्यक सामान निकलवाने के लिए मंगलवार को राजस्थान बीज निगम के पूर्व निदेशक चर्मेश शर्मा से मदद मांगी थी। उसके बाद शर्मा ने मौके पर पहुंचकर सीज करने वाली कंपनी के अधिकारियों से दूरभाष पर वार्ता की थी, जिसमें उनकी कंपनी के अधिकारियों से तीखी बहस हुई थी।
शर्मा ने मकान सीज करने के दौरान कर्जदार की अनुपस्थिति में महिलाओं और बच्चों को जबरन घर से निकालने के साथ छात्राओं के दसवीं बोर्ड के प्रवेश पत्र और परिवार के खाने-पीने के आवश्यक सामान तक बाहर नहीं निकालने देने पर सिजिंग करने वाली फाइनेंस कंपनी के विरुद्ध मानव अधिकार आयोग में केस दर्ज करवाने की चेतावनी दी थी। शर्मा ने कहा कि कोई भी मकान इस तरह अमानवीय तरीके से सीज नहीं किया जा सकता है।