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Shimla: एलपीजी संकट और पेट्रोल-डीजल पाबंदी पर भड़की माकपा, सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 14 Jun 2026 03:53 PM IST
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भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने हिमाचल प्रदेश में रसोई गैस सिलेंडरों की कथित किल्लत और पेट्रोल-डीजल वितरण पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर केंद्र और प्रदेश सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। पार्टी ने कहा कि इन व्यवस्थाओं का सबसे अधिक असर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों, किसानों और बागवानों पर पड़ रहा है। माकपा के राज्य सचिव संजय चौहान ने जारी बयान में कहा कि केंद्र सरकार द्वारा एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति को लेकर लागू की गई शर्तों के कारण प्रदेश में रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है। उनका आरोप है कि कई ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले तीन महीनों से गैस सिलेंडरों की नियमित आपूर्ति नहीं हो पा रही है, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को गैस सिलेंडर लेने के लिए 500 से 1000 रुपये तक अतिरिक्त खर्च कर गैस एजेंसियों तक पहुंचना पड़ रहा है। इसके बावजूद कई बार उन्हें सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो रहा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अधिकांश घरों में रसोई गैस ही भोजन पकाने का प्रमुख साधन है, ऐसे में आपूर्ति बाधित होने से लोगों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। माकपा ने सरकार से प्रदेश में रसोई गैस की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है। संजय चौहान ने कहा कि 11 जून 2026 को जारी केंद्र सरकार की अधिसूचना के बाद पेट्रोल और डीजल के वितरण को लेकर लगाए गए प्रतिबंधों का असर किसानों और बागवानों पर पड़ रहा है। उनका कहना है कि पेट्रोल पंपों पर कैन और बोतलों में पेट्रोल-डीजल देने पर रोक लगने से कृषि कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के किसान और बागवान पावर टिलर, स्प्रे मशीन, घास काटने की मशीन, लकड़ी काटने की मशीन तथा ग्रेडिंग-पैकेजिंग उपकरणों के संचालन के लिए पेट्रोल और डीजल का उपयोग करते हैं। ऐसे में ईंधन उपलब्ध न होने से खेती-बागवानी संबंधी कार्य प्रभावित हो रहे हैं। माकपा ने केंद्र और प्रदेश सरकार से मांग की है कि रसोई गैस की आपूर्ति व्यवस्था को तुरंत सामान्य बनाया जाए तथा किसानों और बागवानों की सुविधा के लिए पेट्रोल-डीजल वितरण पर लगाई गई पाबंदियों में आवश्यक राहत प्रदान की जाए।
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