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VIDEO: हर साल बढ़ रहे दमा-सांस के 12 फीसदी मरीज, 75 जिलों में होगा शोध
हवा में कार्बन, भारी तत्व, पीएम 2.5 तत्व तेजी से बढ़ रहे हैं। इससे हर साल दमा-सांस रोग के 10 से 12 फीसदी मरीज बढ़ रहे हैं। इससे असमय मौत भी हो रही है। इसकी वजह-दुष्प्रभाव जानने के लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने उत्तर प्रदेश क्लीन एयर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट शुरू किया है। इसमें 15 संस्थानों को 75 जिलों में शोध की जिम्मेदारी दी गई है। विश्व बैंक इसका खर्च वहन करेगा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय को आगरा, मथुरा और इटावा, सेंटर फॉर द डेवलपमेंट ऑफ ग्लास इंडस्ट्री को फिरोजाबाद और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को अलीगढ़, एटा, हाथरस और कासगंज मिला है। इनमें लैब बनेगी और पर्यावरण संबंधी नए पाठ्यक्रम भी शुरू होंगे। इनके लिए आईआईटी कानपुर पाठ्यक्रम तय करेगा। प्रोजेक्ट में चार मिनी सुपर साइट (आगरा, अलीगढ़, गोरखपुर, झांसी) बनेंगी। विश्व बैंक से शासन के साथ समझौता हुआ है। लैब के लिए 27.9 लाख रुपये और मिनी सुपर साइट के लिए 5.20 करोड़ रुपये मिलेंगे। विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लाइफ साइंस के निदेशक और प्रोजेक्ट के नोडल अधिकारी प्रो. भूपेंद्र स्वरूप शर्मा ने बताया कि विशेषज्ञ प्रदूषित क्षेत्र चिह्नित कर उपकरण लगाएंगे। हर साल न्यूनतम 104 नमूने लेकर लैब में कार्बन, पीएम 2.5 समेत अन्य की जांच करेंगे। 525 से अधिक नमूनों की लैब में जांच करने के बाद वजह, दुष्प्रभाव और बचाव की रिपोर्ट शासन को भेजेंगे। इसके आधार पर शासन गाइडलाइन बनाएगा। प्रोजेक्ट की प्रक्रिया शुरू हो गई है। एसएन मेडिकल कॉलेज में वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि प्रदूषण की वजह से हवा में कार्बन, आर्सेनिक, लेड, सल्फर डाई ऑक्साइड समेत कई तरह के हानिकारक गैस और तत्व मिल रहे हैं। इससे दमा, सांस रोग और टीबी की बीमारी बढ़ रही है। लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से फेफड़े का कैंसर भी बढ़ रहा है। युवाओं में यह तेजी से बढ़ रही है। हर महीने ओपीडी में औसतन 7500 मरीज आ रहे हैं। प्रदूषण से हर साल 10 से 12 फीसदी मरीज बढ़ रहे हैं।
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