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VIDEO: आगरा के गढ़मुक्खा में पानी के लिए हाहाकार, सूखा पड़ा तालाब; दो हैंडपंप के सहारे छह हजार की आबादी
आगरा के कागारौल विकास खंड खेरागढ़ की ग्राम पंचायत बेरी चाहर के अंतर्गत आने वाले गांव गढ़मुक्खा में भीषण पेयजल संकट ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। करीब 6 हजार से अधिक आबादी वाले इस गांव में मीठे पानी के लिए मात्र दो हैंडपंप ही सहारा बने हुए हैं। ये दोनों हैंडपंप गांव से लगभग एक किलोमीटर दूर हनुमान मंदिर परिसर में लगे हैं, जहां सुबह होते ही महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की लंबी कतारें लग जाती हैं। ग्रामीणों के अनुसार गांव के अधिकांश हैंडपंपों और अन्य जल स्रोतों का पानी खारा हो चुका है। पानी में फ्लोराइड की बढ़ती मात्रा के कारण बीमारियां भी बढ़ रही हैं। लोगों का कहना है कि खारे पानी की समस्या के चलते कई परिवारों ने पशुपालन तक बंद कर दिया है। भीषण गर्मी में यह संकट और गहरा गया है, जिससे गांव में पानी के लिए मारामारी जैसी स्थिति बनी हुई है। गांव के बाहर दिगरौता रोड पर कागारौल ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाला तालाब भी सूखा पड़ा हुआ है, जिससे पशुओं के लिए भी पेयजल संकट बना हुआ है। स्थानीय ग्रामीण हरिओम लवानिया ने बताया कि गांव में मीठे पानी की समस्या के समाधान के लिए सांसद निधि से गांव के बाहर एक बड़ी पानी की टंकी का निर्माण कराया गया था, लेकिन वह आज तक उपयोग में नहीं आ सकी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई और टंकी सफेद हाथी साबित हो रही है। गांव में बनी 6-7 टीटीएसपी टंकियां भी बंद पड़ी हैं, जिनसे लंबे समय से पानी की सप्लाई नहीं हो रही है। गांव के बाहर दिगरौता रोड पर स्थित तालाब भी ग्रामीणों की चिंता का कारण बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि करीब चार वर्ष पूर्व कागारौल ग्राम पंचायत ने तालाब की खुदाई और सौंदर्यीकरण के नाम पर लाखों रुपये खर्च किये थे, लेकिन आज तक उसमें पानी नहीं भरा गया और ना ही उसका सौंदर्यीकरण किया गया। गर्मी के मौसम में तालाब के सूखे पड़े रहने से जल संकट और गंभीर हो गया है। पशु-पक्षियों को भी पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। सोमवार को पानी की समस्या से परेशान ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण एकजुट होकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए तालाब तक पहुंचे और उसमें पानी भरवाने की मांग की। ग्रामीणों ने प्रशासन के प्रति अपना रोष व्यक्त करते हुए कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो ग्रामीण भूख हड़ताल पर बैठ धरना प्रदर्शन करेंगे।
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