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VIDEO: गन्ने की फसल पर चोटी बेधक और अंकुर बेधक का प्रकोप, फसल को नुकसान होने का खतरा
गन्ने की नगदी फसल में मई माह में चोटी बेधक और अंकुर बेधक कीट का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। इससे किसानों को फसल बर्बाद होने का अंदेशा सताने लगा है। बेलगरा के प्रगतिशील किसान विवेक कुमार वर्मा ने बताया कि इस समय मौसम इन कीटो लिए बेहद अनुकूल है।
कीट की पहली पीढ़ी खत्म होने वाली है और दूसरी पीढ़ी का हमला शुरू होने को है। अगर समय रहते रोकथाम नहीं की गई तो नुकसान बढ़ सकता है। विवेक कुमार कहते हैं कि पहली पीढ़ी में ही रोक लिया तो दूसरी नहीं आएगी। ट्राइकोकार्ड से ही 60 प्रतिशत कंट्रोल हो जाता है।
कैसे करता है नुकसान यह कीट लार्वा अवस्था में गन्ने के सबसे ऊपर वाले कोमल पत्ते में छेद करके अंदर घुस जाता है। अंदर ही अंदर वह कोमल तने के ऊपरी हिस्से को खा जाता है। इससे पौधे की वृद्धि रुक जाती है और बाद में पूरा पौधा सूख जाता है।
इसे डेड हार्ट कहा जाता है। इस कीट के आपतन होने से 20 से 25 प्रतिशत तक उपज में कमी हो जाती है। ग्रसित पौधों की पहचान प्रारंभिक अवस्था में गोंभ के पास की पत्ती के मध्य सिरा पर लाल धारी का पाया जाना। गोंभ के पास की पत्तियों पर छर्रेनुमा गोल-गोल छेद का होना। झाड़ीनुमा सिरा यानी बंची टॉप का पाया जाना।
एक्सपर्ट की सलाह: गन्ना शोध संस्थान शाहजहांपुर के निदेशक डॉ बीके शुक्ला व कृषि वैज्ञानिक डॉ सुजीत प्रताप सिंह ने बताया कि अभी दूसरी पीढ़ी को रोकना सबसे जरूरी है। इसके लिए तुरंत निरीक्षण कर खेत में रोज घूमकर डेड हार्ट दिखते ही तोड़कर नष्ट करें।
जैविक नियंत्रण के लिए अनुकुल वातावरण में चोटी बेधक कीट के जैविक नियन्त्रण हेतु अण्ड परजीवी ट्राइकोग्रामा जापोनिकम की 20000 वयस्क प्रति एकड़ की दर से अण्डरोपड़ के समय माह जून से 15 दिन के अन्तराल पर गन्ने की पत्तियो पर प्रत्यारोपित करें। गन्ना बुवाई से कटाई तक फेरोमोन ट्रैप 10 नग प्रति एकड़ का प्रयोग करें।
ज्यादा प्रकोप पर शाम के समय अंकुर बेधक और चोटी बेधक के लिए क्लोरेन्टरानिलीपरोल 18.5 SC 150 मिली प्रति 400 लीटर पानी की दर से एक एकड़ खेत मे जड़ों के पास ड्रेंचिंग करें और 6 घंटे में हल्की सिंचाई करें।
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