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VIDEO : आजमगढ़ में मिट्टी की प्रतिभा दिला रही अंतर्राष्ट्रीय पहचान, बिना कोच के चलने वाला एक अखाड़ा, जानें खास बातें
नगर के कदम घाट पर स्थित एक ऐतिहासिक अखाड़ा आज भी कुश्ती के शौकीनों का केंद्र बना हुआ है। कभी इस अखाड़े में जिले के मशहूर पहलवान स्व. सुखदेव पहलवान कुश्ती लड़ा करते थे, जिन्होंने यहां से सीखकर पूरे देश में अपनी पहचान बनाई।
खास बात यह है कि वर्तमान में यह अखाड़ा बिना किसी कोच के संचालित हो रहा है, लेकिन इसकी लोकप्रियता और खिलाड़ियों का जज्बा कम नहीं हुआ है। आज भी यहां के पहलवान देश-विदेश में अपना परचम लहरा रहे हैं। कदम घाट का यह अखाड़ा एक समय स्व. सुखदेव पहलवान जैसे दिग्गजों का गढ़ हुआ करता था।
उनकी मेहनत और लगन ने इस अखाड़े को ख्याति दिलाई। स्व. सुखदेव पहलवान ने यहीं से कुश्ती की बारीकियां सीखीं और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाई। उनके बाद भी यह अखाड़ा कुश्ती प्रतिभाओं का केंद्र बना रहा।
कोच नहीं एक बुजुर्ग बताते हैं दांव पेंच
हैरानी की बात है कि आज इस अखाड़े में कोई औपचारिक कोच नहीं है। यहां आने वाले युवा खिलाड़ी एक बुजुर्ग द्वारा सिखाए गए दांव पेंच का अभ्यास करते हैं और एक-दूसरे से सीखते हैं। परंपरा और जुनून के दम पर यह अखाड़ा जीवंत है।
स्थानीय खिलाड़ियों का कहना है कि सुखदेव पहलवान की प्रेरणा और अखाड़े की मिट्टी में बसी कुश्ती की भावना उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।
खिलाड़ियों की उपलब्धियां
बिना कोच के संचालन के बावजूद इस अखाड़े से निकले पहलवान अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। कई पहलवान राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रहे हैं, तो कुछ ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी सफलता हासिल की है।
जिले से निकले अभिमन्यु, गोपाल, अर्जुन आदि पहलवान शामिल हैं। राष्ट्रीय पहलवान रीतेश यादव और प्रिंस यादव ने बताया कि अब मिट्टी में कुश्ती की प्रतियोगिताएं नहीं होती हैं। कदम घाट पर आज भी पहलवान मिट्टी के अखाड़े में ही प्रैक्टिस करते हैं। ना ही यहां पर कोच हैं फिर काफी संख्या में यहां से निकले पहलवान लोगों को अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हैं।
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