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VIDEO : कवि सम्मेलन में खूब बजी तालियां, देर रात तक डटे रहे काव्य प्रेमी
कहां गया हाय मेरा दिन वो सलोना रे, हाथों में थामे माटी का खिलौना रे, वही मेरा चांदी था वही मेरा सोना रे..जहां मन जाते थे जो मन खाते थे और गेंदा के फूल से तितली उड़ाते थे कहां गया मेरे मन का वो खिलौना रे...कवि निलोत्तपल मृणाल की इन पंक्तियों पर खूब तालियां बजीं। मौका था छत्रपति शाहू जी महाराज विश्विद्यालय के वीरांगना रानी लक्ष्मी बाई सभागार में आयोजित अमर उजाला की ओर से आयोजित कवि सम्मेलन काव्य रंग का।
कहा कि अब देश में बच्चे नहीं सब्सक्राइबर पैदा हो रहे हैं। डॉक्टर कहते हैं कि अस्पताल को लाइक करो। दुकान पर जाओ तो वो भी लाइक सब्सक्राइब करने को कहता है। चुटीले अंदाज में बताया कि पहले एक पीढ़ी सेवाग्राम की थी अब इंस्टाग्राम की है। हर पीढ़ी दूसरे को अपना अनुभव बताती है। उस दौर का जादू क्या जाने रील बनाने वाले लड़के..सुनाया तो श्रोताओं में जमकर उत्साह दिखा। काव्य रंग की शुरूआत कवियत्री पद्मिनी शर्मा ने सरस्वती वंदे शारदे जगमग जग कर दे, तू दयानी तू है भवानी तू सुखदायी मां शारदे ...की वंदना से की।
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