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VIDEO: 84 कोसीय धर्मयात्रा : भक्ति , आस्था और अध्यात्म की त्रिवेणी से राम नाम संकीर्तन के साथ गुजरा सनातन रामादल का सतत कारवां
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VIDEO: 84 कोसीय धर्मयात्रा : भक्ति , आस्था और अध्यात्म की त्रिवेणी से राम नाम संकीर्तन के साथ गुजरा सनातन रामादल का सतत कारवां
आस्था , धर्म और अध्यात्म का एक अनूठा संगम आज 88 हजार ऋषियों की पावन तपोभूमि नैमिषारण्य में देखने को मिला, जब राम नाम की इस अद्भुद अनूठी यात्रा ने इस वर्ष की 84 कोसीय धर्मयात्रा का पावन क्रम प्रारम्भ किया। आज सुबह पहला आश्रम महंत नारायण दास द्वारा परम्परागत रूप से डंका बजाने के साथ ही आध्यात्म और आस्था के अनूठे संगम का शानदार आगाज़ हो ही गया।
भक्ति और मोक्ष की कामना से इस परिक्रमा में भाग ले रहे लाखों श्रद्धालुओं का इस परिक्रमा के प्रति उत्साह देखते ही बन रहा था। इस अनोखे धर्मपथ पर देश विदेश के लाखों श्रद्धालुगण धर्म की मस्त फुहारों में भीगते से नज़र आ रहे थे। जिसमे कोई सन्त जहां फक्कड़ भाव से चिमटा बजाते हुए अपनी ही धुन में गुनगुनाता जा रहा था तो कोई सन्त पालकी में बैठ कर परम्परा का निर्वहन करते दिख रहा था। वहीं कोई सन्त डमरू की धुन पर सबको मंत्रमुग्ध कर रहा था।
यहां का आलम कुछ ऐसा था कि एक और जहां कोई श्रद्धालु परिक्रमा पथ पर ही दण्डवत प्रणाम की मुद्रा में दिख रहा था तो कोई ग्रामीण श्रद्धालु अपने नन्हे मुन्हे बच्चो के साथ साइकिल पर ही परिक्रमा मार्ग पर बढ़ रहा था। इसी क्रम में मध्य प्रदेश से आई कई महिला श्रद्धालु भगवान शालिग्राम और तुलसी जी के पौधे को अपने सिर मत्थे पर रख परिक्रमा का आनन्द लेने के लिए प्रतिबद्ध दिख रही थी। तो कोई युवा सरपट दौड़कर परिक्रमा पथ पर बढ़ रहा था। वही कोई बुजुर्ग डंडे के सहारे तो कोई दिव्यांग ट्राई साइकिल से ही परिक्रमा की राह पर बढ़ता जा रहा था।
इस परिक्रमा में देश की विभिन्न संस्कृतियों के दर्शन एक साथ देखना बड़ा ही अलग अनुभव होता है। जिसमे कोई यात्री मंडल जहां खँजड़ी की थाप पर थिरकते हुए बढ़ता दिखता है, तो कोई भक्त मंडल ढोल मंजीरे की धुन पर ही सम्मोहित सा दिखता है। यहां विभिन्न प्रदेशों के यात्रियों द्वारा परम्परागत लोकगीतों का मधुर स्वर बरबस सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करता है तो " बोल कड़ाकड सीताराम " , " जय श्री राम " , " राधे राधे , " नैमिष धाम की जय " के तेज जयकारे एक अलग ही धार्मिक माहौल का अहसास दे रहे थे। जब ये धर्मयात्रा गांवों से गुजर रही थी तो परिक्रमा मार्ग के किनारे खड़े ग्रामीण बच्चे भी जोर जोर से जयकारे लगाकर अपने स्तर से परिक्रमार्थियों का उत्साह बढ़ा रहे थे।
महर्षि दधीचि के त्याग व प्राणियों के मोक्ष के लिए की गई सिद्धि बुद्धि मुक्ति की परिचायक इस परिक्रमा में भारत देश के मध्य प्रदेश , हरियाणा , पंजाब , उत्तरांचल , राजस्थान , दिल्ली , छत्तीसगढ़ , बिहार , महाराष्ट्र आदि प्रदेशो समेत पड़ोसी देश नेपाल , भूटान के भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण सनातन धर्म परम्परा का पालन करते हुए इस परिक्रमा का भाग बन खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे थे ।
" ऐसे हुआ परिक्रमा का शुभारम्भ "
ब्रहस्पतिवार सुबह जैसे ही घड़ी ने 3:00 बजाये वैसे ही परिक्रमार्थियों ने आदि गोमती गंगा व चक्रतीर्थ में स्नान दर्शन का क्रम शुरू कर दिया था , स्नान दर्शन के बाद जब घड़ी की सुई 4 बजे पहुंची तब पहला आश्रम महंत भरत दास जी द्वारा डंके की पारंपरिक ध्वनि की धार्मिक गूंज नैमिष तीर्थ की हवाओं में गूँजने लगी और लाखों परिक्रमार्थियों का कारवां इस पवित्र धर्म यात्रा में राम नाम जयकारे के साथ निकल पड़ा ।
" परिक्रमार्थियों पर हुई पुष्पवर्षा , परिक्रमा अध्यक्ष , साधु सन्तो व पुरोहितों का किया सम्मान , डंके का किया पूजन "
इस सनातन यात्रा में पहली बार आज प्रशासन द्वारा अनूठी पहल की गई जिसके चलते आज सुबह मिश्रिख एसडीएम राजीव पांडेय द्वारा चक्रतीर्थ पुजारी राज नारायण पाण्डेय द्वारा वैदिक मंत्रोचार के मध्य सबसे पहले 84 कोसीय परिक्रमा समिति के अध्यक्ष व पहला आश्रम महंत नारायण दास जी का पूजन व माल्यार्पण कर स्वागत अभिनंदन किया गया इसके बाद परंपरागत ढंग से डंका लेकर चलने वाले घोड़े और डंके का पूजन किया गया इसी क्रम में इस अद्भुत परिक्रमा में प्रतिभाग कर रहे सभी प्रारंभिक परिक्रमार्थियों का एसडीएम अभिनव यादव मेला प्रभारी जनार्दन, सीओ विशाल गुप्ता, नैमिष थाना प्रभारी नवनीत मिश्रा, पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष मुनिंद अवस्थी प्रशासन कर्मियों द्वारा माल्यार्पण कर अभिनंदन किया गया वहीं सभी परिक्रमार्थियों के ऊपर पुष्प वर्षा भी की गई l
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