{"_id":"6a71c0082d0a8913df0c35b0","slug":"video-the-chehlum-procession-of-the-400-year-old-kali-turbat-was-taken-out-with-reverence-in-varanasi-2026-08-04","type":"video","status":"publish","title_hn":"वाराणसी में 400 वर्ष पुरानी काली तुरबत का चेहल्लुम जुलूस अकीदत से निकला:VIDEO","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वाराणसी में 400 वर्ष पुरानी काली तुरबत का चेहल्लुम जुलूस अकीदत से निकला:VIDEO
वाराणसी में हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मंगलवार को चेहल्लुम का जुलूस निकाला गया। शहर में 400 वर्ष पुरानी काली तुरबत का आलम पूरे अकीदत और गमगीन माहौल के बीच उठाया गया। यह जुलूस सुबह करीब 11 बजे इमामबाड़ा कच्ची सराय, दालमंडी से शुरू हुआ। आलम की देखरेख सैयद इकबाल हुसैन और जफर हसन ने की। जुलूस का नेतृत्व अंजुमन जावादिया ने किया। यह दालमंडी, नई सड़क, फाटक, सलीम काली महाल और पितरकुंडा से गुजरा। जुलूस फातमान पहुंचकर संपन्न हुआ। पूरे मार्ग में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। उन्होंने हजरत इमाम हुसैन की याद में मातम कर खिराज-ए-अकीदत पेश की। अंजुमन जावादिया के नोहाख्वां साजिद हुसैन ने नोहा पढ़े। इनमें शायर कविश बनारसी का लिखा नोहा "गूंजी है कर्बला में सदा, मैं हुसैन हूं, नाना मेरे रसूले खुदा, मैं हुसैन हूं" शामिल था। नोहाख्वानी और मातम से वातावरण गम और अकीदत से भर गया। कई अकीदतमंद इस दौरान भावुक भी हो उठे।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।