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Nainital: लिटरेचर फेस्टिवल में सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर संवाद, सुहेल सेठ ने कहा कि धामी को धीमा करने के लिए लगाने पड़ेगा दम
गायत्री जोशी
Updated Sat, 14 Mar 2026 11:16 PM IST
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नैनीताल में शनिवार को नैनीताल लिटरेचर फेस्टिवल केवल साहित्यिक चर्चाओं तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि यहां सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर भी संवाद हुआ। संवाद करते हुए प्रसिद्ध लेखक और उद्यमी सुहेल सेठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि धामी को धीमा करने के लिए दम लगाना पड़ेगा। ये लोग बौद्धिक रूप से निर्दोष हैं। आपको धामी को बुलाना होगा और बोलना पड़ेगा कि यह झील है यहां पानी का स्तर कम हो रहा है। नैनीताल लिटरेचर फेस्टिवल 2026 के दूसरे दिन 14 मार्च को कांस्या रिजॉर्ट, माउंटेन मैजिक, चारखेत में साहित्य, राजनीति, तकनीक, सिनेमा और कला पर गहन चर्चाएं हुईं। इस साहित्यिक आयोजन में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम का संचालन देव्यानी और हरनमन सिंह ने किया। इस दौरान सुहेल सेठ ने नैनीताल की स्थिति पर चर्चा करते हुए कहा कि नैनीताल में मैं पला बड़ा हूं। उस समय का जो नैनीताल था और आज का जो नैनीताल है, उसकी हालत बिगड़ी हुई है। लेकिन नैनीताल के निवासी कुछ बोलते नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिक को हिंदू-मुस्लिम की समस्या नहीं है, उसको अपने बच्चे की परवरिस, शिक्षा, अच्छा खाना और कानून व्यवस्था की चिंता है। प्रधानमंत्री डेवलपमेंट का बहुत ख्याल रख रहे हैं, लेकिन उनकी सरकार के ही लोग उनके मंसूबे पर पानी फेर रहे हैं। हरियाणा और नैनीताल में यही हाल है। बड़ी-बड़ी बिल्डिंग निर्माण के लिए अनुमति मिल रही है लेकिन पार्किंग की व्यवस्था नहीं है, यानि की अनुमति रिश्वत देकर मिल रही है। लेकिन फिर भी कोई कार्रवाई नहीं। इस दौरान पुष्पेश पंत की किताब नैनीताला नैनीताला के विमोचन से हुई, जिसमें नैनीताल की स्मृतियों और सांस्कृतिक परिवेश पर विचार रखे गए। इन द शैडोज ऑफ द एपिक्स सत्र में भारतीय महाकाव्यों के कम चर्चित पात्रों पर नई व्याख्याएं प्रस्तुत की गईं। लेखिका वसुंधरा ने "द एक्यूज्ड" सत्र में अपराध कथाओं की जटिलताओं और सत्य, न्याय के मनोवैज्ञानिक पक्षों पर चर्चा की। हर अनमैप्ड रील्म्स में गीतअर्श कौर, मधुरीता आनंद और सुभाषिनी अली ने महिलाओं के अनुभवों और सामाजिक सीमाओं से परे उनकी संभावनाओं पर बात की। नेहरू टू नरेंद्र सत्र में भारतीय राजनीति के विभिन्न दौरों और प्रमुख हस्तियों पर अनिरुद्ध गुप्ता और समीर संधीर ने अनुभव बताए।
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