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यूपीएससी में 590वीं रैंक लाने वाले महेश का बहराइच में हुआ स्वागत
सालों की कठिन तपस्या, अनगिनत सपनों और परिवार की उम्मीदों का परिणाम जब हकीकत बनकर सामने आया तो वह पल भावनाओं से भर उठा। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में 590वीं रैंक हासिल कर घर लौट रहे बहराइच के महेश जायसवाल के स्वागत के दौरान कुडवा मोड़ पर ऐसा ही मार्मिक दृश्य देखने को मिला, जिसने हर किसी का दिल छू लिया। बृहस्पतिवार को जैसे ही महेश की गाड़ी कुडवा मोड़ पर पहुंची, पहले से स्वागत के लिए जुटे ग्रामीणों की भीड़ और सामने खड़े अपने बड़े भाई दुर्गेश जायसवाल को देखकर वह तुरंत गाड़ी से उतर पड़े। सफलता के शिखर पर पहुंचने के बाद भी विनम्रता से झुकते हुए उन्होंने सबसे पहले अपने बड़े भाई के चरण स्पर्श किए। छोटे भाई की इस उपलब्धि और संस्कारों को देखकर बड़े भाई दुर्गेश की आंखें भर आईं। उन्होंने स्नेह से छोटे भाई के गाल पर हाथ फेरा तो वर्षों की मेहनत, संघर्ष और सपनों की कहानी जैसे उन आंसुओं के साथ बह निकली। और दोनों भाई अपनी भावनाओं को रोक नहीं सके और उनकी आंखों से खुशी की अश्रुधार बहने लगी। वहां मौजूद लोग भी इस भावुक पल को देखकर गदगद हो उठे।महेश की इस उपलब्धि ने पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित कर दिया है। साधारण परिवार से निकलकर उन्होंने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। महेश ने बताया कि उनकी इस सफलता का श्रेय पिता राम कुमार माता बृजरानी भाई दुर्गेश बृजेश के साथ पूरे परिवार के साथ उनको शिक्षा देने वाले गुरुजनों का भी है तो परिजनों के साथ ग्रामीण अपने क्षेत्र के होनहार लाल को फूल-मालाओं से भव्य स्वागत करते हुए और मिठाइयां बांटकर खुशी का इजहार कर रहे हैं। ग्रामीणों और युवाओं का कहना है कि महेश की सफलता इस बात का संदेश देती है कि परिस्थितियां चाहे जितनी कठिन क्यों न हों, यदि लक्ष्य के प्रति समर्पण और मेहनत सच्ची हो तो सफलता अवश्य मिलती है। कुडवा मोड़ से लेकर गांव तक लोगों में उत्साह का माहौल बना रहा। जगह-जगह लोग उनके स्वागत के लिए खड़े दिखाई दिए। महेश की सफलता ने न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है और युवाओं के लिए एक नई प्रेरणा भी बन गई है।
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