विधान परिषद के बजट सत्र में एमएलसी नीरज कुमार द्वारा उठाए गए गंगा कटाव के मुद्दे पर सरकार ने त्वरित संज्ञान लिया है। मोकामा प्रखंड के औटा गांव में गंगा नदी के लगातार हो रहे भीषण कटाव को लेकर उन्होंने सदन में गंभीर चिंता जताई थी और तुरंत ठोस कदम उठाने की मांग की थी। उनके सवाल के बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है।
बाढ़ नियंत्रण विभाग की टीम ने किया निरीक्षण
इसी क्रम में बाढ़ नियंत्रण विभाग के कनीय अभियंता अरुणेश कुमार शुक्रवार को मोकामा प्रखंड के औटा गांव पहुंचे। उन्होंने कटाव प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान गंगा किनारे के उन हिस्सों को देखा गया, जहां तेजी से जमीन धंस रही है और नदी का रुख आबादी की ओर बढ़ रहा है। कनीय अभियंता ने माना कि स्थिति बेहद गंभीर और भयावह है। उन्होंने कहा कि कटाव की पूरी रिपोर्ट तैयार कर वरीय अधिकारियों को भेजी जाएगी, ताकि जल्द से जल्द कटाव रोधी कार्य शुरू किया जा सके।
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डेढ़ हजार बीघा जमीन गंगा में समाई
ग्रामीणों ने अधिकारियों को बताया कि अब तक एक से डेढ़ हजार बीघा उपजाऊ जमीन गंगा में समा चुकी है। किसानों की वर्षों की मेहनत और आजीविका का मुख्य साधन रही यह जमीन नदी में बह गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस इंतजाम नहीं किए गए तो गंगा की धारा सीधे गांव के रिहायशी इलाके तक पहुंच जाएगी। इससे सैकड़ों परिवारों के विस्थापन का खतरा पैदा हो सकता है।
पंचायत भवन और अस्पताल पर भी खतरा
स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि गंगा किनारे बना पंचायत सरकार भवन और अस्पताल भी कटाव की जद में आ सकते हैं। हालांकि विभागीय निरीक्षण के बाद ग्रामीणों में उम्मीद जगी है कि अब जल्द ही स्थायी समाधान की दिशा में कार्रवाई शुरू होगी।