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74 cases related to stubble burning were registered online in Bhiwani, with FIRs filed in 18 cases
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भिवानी में इंटरनेट के माध्यम से 74 मामले पराली के हुए दर्ज, 18 मामलों में एफआईआर
हरियाणा प्रदेश में पराली प्रबंधन को लेकर राज्य सरकार ने विशेष प्रबंध करते हुए सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। यदि प्रदेश में किसान पराली जलाता है तो उस किसान की सरकारी रिकॉर्ड में रैड एंट्री की जाएगी। जिससे उसको सब्सिडी व सरका से मिलने वाले अन्य लाभ नहीं मिल सकेंगे। जिन क्षेत्रों में जीरी या पराली संबंधित फसलें बोई जाती है, उनके प्रबंधन के लिए किसानों को प्रोत्साहन के तौर पर 1200 रुपये प्रति एकड़ सहायता राशि भी दी जा रही है। यह बात भिवानी के पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अधिकारी शैलेंद्र कुमार ने पत्रकारों से बातचीत में कही।
उन्होंने बताया कि पराली प्रबंधन को लेकर एग्रीकल्चर वेलफेयर एसोसिएशन के साथ मिलकर पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने कैंप लगाकर किसानों को जागरूक करने का काम किया है। इसके साथ ही अनाज मंडी, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन व अन्य सार्वजनिक स्थानों पर पराली प्रबंधन को लेकर बैनर लगाए गए है। इसके साथ ही एग्रीकल्चर विभाग की मदद से जिला स्तर, सब डिविजन स्तर, ब्लॉक स्तर व गांव स्तर पर पटवारी, कानूनगो व सरपंच के साथ मिलकर टीमें बनाई गई है। जो पराली जलने की घटनाओं पर नजर रखेंगी। उन्होंने कहा कि उनके विभाग ने अब तक भिवानी जिले में सेटेलाइट के माध्यम से 74 आगजनी के केस दर्ज किए थे। जिनमें 29 स्थानों पर मौके पर आग नहीं पाई। 19 स्थानों पर जहां आग पाई गई, वहां पर 18 मामलों में एफआईआर के लिए लिखा है तथा एक मामले में 5 हजार रुपये का चालान भी किया है। उन्होंने कहा कि किसानों को चाहिए कि भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने के लिए पराली को ना जलाए, बल्कि उसका खाद के रूप में प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से एयर क्वालिटी एंडेक्स बढ़ता है तथा किसान के खेत के मित्र कीट व केंचुए भी जलकर मर जाते है, जिससे भूमि की उपजाऊ शक्ति कम होती है।
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