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BKU President Gurnam Chaduni writes to Chief Minister, demanding immediate commencement of procurement.
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भाकियू अध्यक्ष गुरनाम चढूनी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, तत्काल खरीद शुरू करने मांग
अनाज मंडियों में पिछले करीब 15 दिनों से सरसों व तोरिया की फसल आने लगी है लेकिन सरकारी खरीद शुरू नहीं हो पाई, जिसका फायदा निजी व्यापारी उठा रहे हैं। औने-पौने दाम में फसल खरीदी जा रही है, जिससे किसानों को चपत लग रही है।
जिले की शाहाबाद, थानेसर, पिपली, इस्माईलाबाद, पिपली सहित विभिन्न मंडियों में आवक लगातार बढ़ रही है। किसानों की मानें तो पिछले चार दिन से 600 रुपये तक कम भाव मिल रहा है।
वहीं, बदलते मौसम व गेहूं की कटाई नजदीक देख सरसों व तोरिया की कटाई भी तेज होने लगी है, लेकिन पूरा भाव न मिलने पर किसानों में रोष व बेबसी भी दिखाई देने लगी है।
किसानो की मानें तो दूसरी फसल के लिए खेतों को तैयार किया जाना है तो वहीं गेहूं कटाई सीजन भी निपटाना है, जिसके चलते ज्यादा दिनों तक सरसों व तोरिया कटाई का इंतजार नहीं किया जा सकता। वहीं मौसम भी लगातार बदल रहा है और बारिश हुई तो नुकसान भी होगा।
28 मार्च को सरकारी तौर पर खरीद शुरू होगी, जिसके लिए सरकार की ओर से संबंधित अधिकारियों को दिशा-निर्देश भी दिए गए हैं। लेकिन मंडियों में मनमाने भाव से खरीदी जा रही फसल को लेकर भारतीय किसान यूनियन अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने मुख्यमंत्री को हाल ही में पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने मांग की है कि सरसों व तोरिया की फसल खरीद तत्काल शुरू की जाए जबकि सूरजमुखी की फसल भी एक जून की बजाए 15 मई से खरीद की जानी चाहिए।
एक लाख 34 हजार क्विंटल की हो चुकी आवक
गुरनाम चढूनी ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में बताया कि सात मार्च तक ही मंडियों में एक लाख 34 हजार क्विंटल सरसों व तोरिया की फसल निजी व्यापारियों द्वारा खरीदी जा चुकी है। सरकारी खरीद शुरू न होने के कारण व्यापारी मनमाने रेट लगा रहे हैं। कभी भाव कम तो कभी सूखी फसल न होने का बहाना बनाया जा रहा है। सरकार ने 28 मार्च से सरसों व तोरिया फसल खरीद तय की है लेकिन तब तक बड़े स्तर पर किसानों को नुकसान हो चुका होगा।
5400 रुपये तक की जा रही खरीद
थानेसर अनाजमंडी में आए किसान गुरशिंद सिंह का कहना था कि कई दिन पहले छह हजार से अधिक रेट तक भी सरसों बिकी लेकिन पिछले चार दिन से कम होकर करीब 5400 रुपये तक रेट रह गया है। औने-पौने दाम ही लगाए जा रहे हैं।
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