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Mahendragarh/Narnaul News
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In Narnaul, former NSG Commando Mahtab Singh became the pillar of support for his 'Dharm Behan's' family, performing the *Bhat* ceremony for all six children.
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नारनौल में धर्म बहन के परिवार का सहारा बने पूर्व एनएसजी कमांडो महताब सिंह, सभी 6 बच्चों के भात भरा
हरियाणा के नारनौल के गांव बलाहा कला निवासी पूर्व एनएसजी कमांडो और वर्तमान में दिल्ली पुलिस में कार्यरत महताब सिंह ने सामाजिक भाईचारे, जातिगत एकता और इंसानियत की अनूठी मिसाल पेश की है। ऐसे समय में जब छोटी-छोटी बातों पर रिश्तों में दूरियां बढ़ रही हैं, वहीं महताब सिंह ने धर्म बहन के परिवार का सहारा बनकर समाज को बड़ा संदेश दिया है।
जानकारी के अनुसार, कलाखरी गांव निवासी उनकी धर्म बहन चित्रा के परिवार में शादी समारोह था। चित्रा के सगे भाई सुरेंद्र सिंह का वर्ष 2006 में निधन हो गया था। भाई के निधन के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन ऐसे मुश्किल समय में महताब सिंह ने परिवार का साथ निभाते हुए भाई का पूरा फर्ज अदा किया।
बताया गया कि उन्होंने पहले चित्रा की बेटियों की शादी में भात भरने की रस्म निभाई थी। अब बेटों की शादी में भी वे पूरे मान-सम्मान के साथ भात लेकर पहुंचे। महताब सिंह ने परिवार के सभी छह बच्चों के भात की रस्म निभाकर भाईचारे और अपनत्व की मिसाल कायम की।
महताब सिंह ने कहा कि यह उनके गांव की बेटी है और परमात्मा ने उन्हें भाई का फर्ज निभाने का अवसर दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसे अवसरों पर एक-दूसरे की मदद जरूर करनी चाहिए, क्योंकि भाईचारा और सामाजिक एकता ही समाज की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने लोगों से जात-पात से ऊपर उठकर एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल होने की अपील भी की।
इस मौके पर गांव के सरपंच वीरेंद्र सिंह यादव ने महताब सिंह की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने धर्म बहन मानकर भाई का पूरा हक निभाया है। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसे उदाहरण बहुत कम देखने को मिलते हैं और इसी तरह के कार्य सामाजिक प्रेम और एकता को मजबूत करते हैं।
भात लेकर पहुंचे महताब सिंह का बहन चित्रा और उसके परिवार ने गर्मजोशी से स्वागत किया। चित्रा ने भावुक होते हुए कहा कि भाई के निधन के बाद जीवन में एक खालीपन आ गया था, लेकिन महताब सिंह ने कभी भाई की कमी महसूस नहीं होने दी। भात की रस्म के दौरान माहौल भावुक नजर आया और परिवार की आंखों में खुशी साफ दिखाई दी। गांव के लोगों ने भी महताब सिंह के इस कदम को सामाजिक सद्भाव, भाईचारे और इंसानियत की मिसाल बताया।
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