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लखनऊ: दावत ए सुख़न में चमकी शाइरी और बिखरी अदब की ख़ुशबू, शायरों ने बांधा समां
किसी शायर ने कभी हर किसी की कहानी को जोड़ने वाली ये पंक्तियां ऐसी ही किसी महफ़िल के लिए कही होंगी। अदब वह रोशनी है, जो पीढ़ियों को जोड़ती है और समाज को संवेदनशील बनाती है, इसी ख़याल को ज़हन में रखते हुए गोल्डन ब्लॉसम इम्पीरियल रिसॉर्ट्स में शनिवार को आयोजित 'दावत ए सुख़न' में देश के जाने माने शायरों, कवियों और साहित्य प्रेमियों ने एक मंच पर जुटकर अदब और संस्कृति का बेजोड़ उदाहरण पेश किया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ शायरों और कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को देर तक बांधे रखा। हास्य, व्यंग्य, ग़ज़ल, गीत और कविताओं के रंगों से सजी इस महफिल में साहित्य प्रेमियों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। कार्यक्रम ने न केवल कविता और शायरी की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने का काम किया, बल्कि समाज में आपसी मेलजोल, भाईचारे और सांस्कृतिक मूल्यों को भी मजबूत करने का संदेश दिया।
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