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लखनऊ: 80 की उम्र में हुनर बना सहारा, पेड़ों पर उकेर रहे भगवान की आकृतियां
उम्र के इस पड़ाव पर जब अधिकांश लोग आराम की जिंदगी जीना चाहते हैं, वहीं अलीगंज के चौधरी टोला निवासी 80 वर्षीय इश्तियाक अली आज भी अपने हुनर के दम पर खुद और अपनी पत्नी का भरण-पोषण कर रहे हैं। करीब 65 वर्षों से कारपेंटरी का काम कर रहे इश्तियाक अली ने कुछ वर्ष पहले लकड़ी और पेड़ों पर देवी-देवताओं की आकृतियां उकेरने का हुनर विकसित किया। अब यही कला उनके जीवन का सहारा बनी हुई है।
इश्तियाक अली बताते हैं कि वह पेड़ों और लकड़ी पर भगवान की आकृतियां उकेरते हैं। इसके बाद उनमें रंग भरकर उन्हें आकर्षक रूप देते हैं। उनकी बनाई आकृतियां राहगीरों और आसपास के लोगों को खूब आकर्षित करती हैं। लोग उनकी कला की सराहना करने के साथ ही इन कलाकृतियों को खरीद भी लेते हैं। इससे जो आमदनी होती है, उसी से वह अपनी और पत्नी की जरूरतें पूरी करते हैं।
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