छिंदवाड़ा में मानसून की पहली तेज बारिश ने एक ओर लोगों को भीषण गर्मी से राहत दी तो दूसरी ओर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की हकीकत भी उजागर कर दी। जिले के पिंडरई कला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पहली ही मूसलाधार बारिश के बाद अस्पताल परिसर से लेकर वार्डों तक पानी भर गया।
हालात इतने खराब हो गए कि मरीजों का इलाज प्रभावित हो गया और अस्पताल में भर्ती एक गर्भवती महिला को बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर करना पड़ा। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे लेकर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
रविवार को हुई तेज बारिश के दौरान अस्पताल के चारों ओर जमा पानी और नालियों का गंदा पानी परिसर में घुस गया। कुछ ही देर में अस्पताल की गैलरियां, जनरल वार्ड, उपचार कक्ष और अन्य हिस्से जलमग्न हो गए। मरीजों के बेड के नीचे तक पानी भर गया, जबकि गंदगी और कचरा पानी में तैरता दिखाई दिया। अस्पताल में मौजूद मरीजों और उनके परिजनों को पानी के बीच से गुजरना पड़ा।
इलाज के बजाय पानी निकालने में जुटा स्टाफ
अस्पताल में अचानक जलभराव होने से डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के सामने भी गंभीर समस्या खड़ी हो गई। मरीजों तक पहुंचना मुश्किल हो गया। कई जगह फर्श पूरी तरह पानी में डूब जाने से फिसलने का खतरा बना रहा। स्वास्थ्यकर्मियों को इलाज के साथ-साथ पानी की निकासी और मरीजों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की व्यवस्था करनी पड़ी। इससे अस्पताल की सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं काफी देर तक प्रभावित रहीं।
गर्भवती महिला को तत्काल रेफर करना पड़ा
जलभराव के बीच अस्पताल में भर्ती एक गर्भवती महिला की स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने जोखिम नहीं लिया। अस्पताल में उपचार प्रभावित होने और आवश्यक सुविधाएं बाधित होने के कारण महिला को तत्काल जिला अस्पताल रेफर किया गया। परिजनों का कहना था कि अस्पताल में पानी भर जाने से मरीजों की सुरक्षा और इलाज दोनों प्रभावित हो गए थे।
पहली ही बारिश में खुल गई तैयारियों की पोल
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बारिश के दौरान अस्पताल में जलभराव की समस्या सामने आती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं किया गया। इस बार भी पहली तेज बारिश ने अस्पताल प्रबंधन के दावों की पोल खोल दी। लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते नालियों की सफाई, जल निकासी और परिसर की समुचित व्यवस्था की जाती तो अस्पताल में इस तरह पानी नहीं भरता।
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सीएमएचओ से संपर्क नहीं हो सका
घटना के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। बाद में सीएमएचओ कार्यालय के मीडिया प्रभारी प्रमोद वासनिक ने बताया कि मामला विभाग के संज्ञान में है। उन्होंने कहा कि अस्पताल नीचले हिस्से में स्थित है, इसलिए आसपास की सड़क और नालियों का पानी परिसर में आ गया, जिससे जलभराव की स्थिति बनी।
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200 मिमी से अधिक बारिश, कई क्षेत्रों में जलभराव
मानसून की दस्तक के बाद से अब तक 200 मिलीमीटर से अधिक वर्षा दर्ज की जा चुकी है। लगातार हो रही बारिश से किसानों में खुशी का माहौल है और खरीफ फसलों की बुवाई को गति मिली है। वहीं शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति भी बनी है। सड़कें पानी में डूबने से लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे बड़ा सवाल
सरकारी अस्पताल ऐसी जगह होते हैं जहां हर परिस्थिति में स्वास्थ्य सेवाएं निर्बाध रूप से उपलब्ध रहनी चाहिए, लेकिन पहली ही बारिश में अस्पताल का जलमग्न हो जाना व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि आने वाले दिनों में और अधिक बारिश होती है तो मरीजों के इलाज और उनकी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी, यह अब स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।