मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में जिला कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई के दौरान एक बुजुर्ग किसान और उसके पुत्र को न्याय की जगह जेल भेजे जाने का मामला सामने आया है। मंगलवार दोपहर हुई इस घटना ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, छेगांव माखन क्षेत्र का एक किसान अपने बेटे के साथ खेत की मेड़ और रास्ते के विवाद को लेकर जनसुनवाई में पहुंचा था। जैसे ही उन्होंने अपना आवेदन प्रस्तुत किया, कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने उन्हें कक्ष से बाहर जाने के लिए कहा। किसान ने अपनी समस्या पर सुनवाई की मांग की, लेकिन कर्मचारियों ने दोनों को बाहर कर दिया।
पढ़ें: एमपी में बनेगा‘राज्य व्यापारी कल्याण बोर्ड’, निर्यात बढ़ाने जिला स्तर तक कमेटियां
इस पर आक्रोशित होकर किसान और उसके पुत्र ने विरोध जताया। स्थिति बिगड़ने पर मौके पर मौजूद अधिकारियों ने कोतवाली थाना पुलिस को बुलाया। पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर बाद में जेल भेज दिया। किसानों का आरोप है कि वे पिछले दो वर्षों से खेत के विवादित रास्ते और मेड़ के मामले में न्याय के लिए भटक रहे हैं। वे जनसुनवाई में हाईकोर्ट के आदेश की जानकारी देने पहुंचे थे, लेकिन उनकी बात सुने बिना ही कार्रवाई कर दी गई।
वहीं, सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर सिंह का कहना है कि किसान जनसुनवाई के दौरान उग्र हो गए थे और अधिकारियों पर हमला करने की स्थिति में थे। इसी कारण उन्हें गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि दोनों को जमानत लेने का अवसर दिया गया था, लेकिन जमानत पेश न करने पर उन्हें जेल भेज दिया गया। इस घटना के बाद प्रशासन की कार्यशैली को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं कि जनसुनवाई में पहुंचे फरियादियों को न्याय क्यों नहीं मिल पाया।