रतलाम जिले के ग्राम पलसोड़ी, बिबड़ौद, रामपुरिया और आसपास के गांवों की करीब 1500 हेक्टेयर भूमि पर प्रस्तावित निवेश क्षेत्र (मेगा इंडस्ट्रियल पार्क) में ग्रामीणों द्वारा पुलिस टीम पर पथराव की घटना के अगले दिन स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही। प्रशासन ने शनिवार को जेसीबी और पोकलेन मशीनों की मदद से सड़क एवं पुलिया निर्माण के लिए भूमि समतलीकरण का कार्य शुरू कर दिया। वहीं पुलिस ने पथराव मामले में पांच नामजद समेत कई आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी है।
उल्लेखनीय है कि 12 जून को जिला प्रशासन का दल पुलिस बल के साथ पलसोड़ी क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने और निर्माण कार्य शुरू कराने पहुंचा था। प्रशासनिक टीम के पहुंचते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए और कार्रवाई का विरोध करने लगे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया कि किसी की निजी भूमि नहीं ली जा रही है, बल्कि शासकीय भूमि पर विकास कार्य किया जा रहा है, लेकिन ग्रामीण नहीं माने।
स्थिति को देखते हुए पुलिस ने शांति भंग की आशंका में 16 ग्रामीणों को हिरासत में लिया। इसके बाद भी विरोध जारी रहा और कुछ लोगों ने पुलिस एवं प्रशासनिक अमले पर पथराव कर दिया। घटना में महिला आरक्षक सहित तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर किया। घटना के बाद क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया था।
शनिवार को क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था के बीच सड़क और पुलिया निर्माण के लिए भूमि समतलीकरण का कार्य शुरू किया गया। जेसीबी, पोकलेन और डंपरों की सहायता से मिट्टी एवं मुर्रम डालकर सड़क निर्माण की तैयारी की गई।
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शासकीय कार्य में बाधा डालने और पथराव का मामला दर्ज
मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (एमपीआईडीसी) के जूनियर इंजीनियर सत्येंद्र सिंह बघेल की शिकायत पर दीनदयाल नगर थाने में प्रकरण दर्ज किया गया है। शिकायत में बताया गया है कि नवीन औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना के लिए कलेक्टर न्यायालय द्वारा भूमि आवंटित की गई है। निर्माण कार्य के लिए प्रशासनिक, राजस्व और पुलिस अमला मौके पर पहुंचा था, जहां ग्रामीणों ने निर्माण कार्य का विरोध करते हुए मशीनों का रास्ता रोक लिया और नारेबाजी शुरू कर दी।
तहसीलदार ऋषभ ठाकुर, एमपीआईडीसी के अधिकारी के.पी. सिंह और पुलिस अधिकारियों द्वारा समझाइश देने के दौरान कुछ लोगों ने पथराव शुरू कर दिया, जिससे महिला आरक्षक शर्मिला जमरा तथा आरक्षक पवन कुमार और राजेंद्र कुमार बारोठ घायल हो गए।
पांच नामजद सहित कई आरोपियों पर केस
पुलिस ने आरोपी मोतीलाल पारगी, जीवन भाभर, भूरालाल मईड़ा, नरेंद्र मुनिया और उनके अन्य साथियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। थाना प्रभारी अनुराग यादव ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी अभी नहीं हो सकी है और उनकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। वहीं शांति भंग के मामले में गिरफ्तार 16 आरोपियों को एसडीएम न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।