जिले के गिरल गांव में पिछले 40 दिनों से मजदूरों का आंदोलन लगातार जारी है। गिरल माइंस के श्रमिकों के समर्थन में शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी भी पिछले 20 दिनों से धरने पर बैठे हैं। रविवार को आंदोलन ने नया मोड़ तब ले लिया, जब विधायक भाटी और मजदूरों ने अपने खून से देश के गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई।
धरनास्थल पर भीषण गर्मी के बीच डटे मजदूरों का कहना है कि उनकी मांगें श्रमिक हितों से जुड़ी बुनियादी मांगें हैं। इनमें 12 घंटे की जगह 8 घंटे की ड्यूटी, सुरक्षा किट, पहचान पत्र और बेहतर कार्य व्यवस्था जैसी सुविधाएं शामिल हैं। मजदूरों का आरोप है कि लंबे समय से आंदोलन जारी रहने के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हो रही।
गृहमंत्री अमित शाह को लिखे पत्र में विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने राजस्थान दौरे पर उनका स्वागत करते हुए गिरल के मजदूरों की पीड़ा से अवगत कराया। पत्र में कहा गया कि सैकड़ों मजदूर अपने हक और सम्मान की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और कंपनी प्रबंधन उनकी समस्याओं की अनदेखी कर रहे हैं। मजदूरों की आवाज उठाने पर कई स्थानीय श्रमिकों को नौकरी से निकाले जाने का भी आरोप लगाया गया है।
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पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि आंदोलन में शामिल अधिकांश मजदूर दलित और पिछड़े वर्ग से हैं। इन परिवारों ने विकास परियोजनाओं के लिए अपनी जमीनें दीं और आज वही लोग मजदूर बनकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। मजदूरों ने उम्मीद जताई कि गृहमंत्री उनके मुद्दों पर हस्तक्षेप कर न्याय दिलाएंगे।
विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि एशिया की सबसे बड़ी ओपन लिग्नाइट माइंस में कार्यरत मजदूर पिछले 45 दिनों से संघर्ष कर रहे हैं। प्रशासन और कंपनी प्रबंधन के साथ कई दौर की बातचीत हुई और कुछ बिंदुओं पर सहमति भी बनी, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया।
उन्होंने बताया कि मजदूरों की 23 सूत्रीय मांगें प्रशासन के समक्ष रखी गई थीं, लेकिन लंबे समय तक कोई अधिकारी उनकी सुध लेने नहीं पहुंचा। हाल ही में छत्तीस कौम के लोगों द्वारा कलेक्ट्रेट घेराव के बाद प्रशासन को आंदोलन की गंभीरता का एहसास हुआ।
भाटी ने कहा कि मजदूरों की मांगें पूरी तरह जायज हैं और उनका समाधान करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जब तक मजदूरों की मांगें पूरी नहीं होंगी, वह हर परिस्थिति में मजदूरों के साथ खड़े रहेंगे।