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करिए अमेठी के गढ़ा माफी का भ्रमण, जहां राजा रक्तंभ सिंह के रहस्यमयी किले पर बस गई आस्था की नगरी
अमेठी में गौरीगंज क्षेत्र का गढ़ा माफी गांव इतिहास, लोककथाओं और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम माना जाता है। जिस स्थान पर कभी राजा रक्तंभ सिंह का विशाल और भव्य किला हुआ करता था, वहां आज सिद्धपीठ बजरंगबली सहित अनेक देवी-देवताओं के मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बने हुए हैं। वर्षों पुरानी मान्यताओं और किले के अवशेषों के कारण यह स्थान इतिहास प्रेमियों और श्रद्धालुओं दोनों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार प्राचीन काल में राजा रक्तंभ सिंह का 52 बीघे क्षेत्र में फैला विशाल किला यहां स्थित था। कहा जाता है कि वैभव और अहंकार के कारण राजा का पतन हुआ और एक रात में पूरा किला धराशायी होकर मलबे में तब्दील हो गया। इसके बाद लाख प्रयासों के बावजूद किले का पुनर्निर्माण नहीं हो सका। बाद में राजा सत्यप्रकाश चंद्र कौशिक ने यहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना कराकर 55 फीट ऊंची बजरंगबली की प्रतिमा स्थापित कराई, जिसके बाद यह स्थान सिद्धपीठ के रूप में प्रसिद्ध हो गया।
आज भी किले के अवशेष जंगल के बीच दिखाई देते हैं। ग्रामीण बताते हैं कि इसकी प्राचीनता का पता लगाने के लिए पुरातत्व विभाग की टीम भी सर्वे कर चुकी है, लेकिन अब तक इसके वास्तविक कालखंड का निर्धारण नहीं हो सका है। गांव के अजय सिंह बताते हैं कि इसी किले के उलटकर ध्वस्त होने और यहां कभी राजकर न लिए जाने की परंपरा के कारण इस स्थान को पहले "उल्टा गढ़ा" और बाद में "गढ़ा माफी" के नाम से पहचान मिली।
मंदिर परिसर में 55 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा के अलावा दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर, भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, ब्रह्मा, शिव-पार्वती, मां दुर्गा और साईं बाबा के मंदिर भी स्थापित हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। यही वजह है कि अमेठी ही नहीं, प्रदेश के विभिन्न जिलों और दूसरे राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु वर्षभर यहां दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। इतिहास और आस्था का यह अनूठा संगम गढ़ा माफी को जिले की विशिष्ट धार्मिक धरोहर के रूप में पहचान दिला रहा है।
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