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VIDEO: कतर्नियाघाट में मादा हाथी की संदिग्ध मौत: हफ्तों सड़ता रहा शव, गश्त और निगरानी पर उठे तीखे सवाल
मिहीपुरवा। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के कोर ज़ोन में एक मादा हाथी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने वन विभाग की सतर्कता और गश्ती व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिछिया बीट के घने बेंत के जंगल में नाले के किनारे पड़ा विशालकाय शव कई दिनों तक सड़ता रहा, लेकिन विभाग को भनक तक नहीं लगी। दुर्गंध फैलने के बाद जब मामला उजागर हुआ तो महकमे में हड़कंप मच गया।
सोमवार को गश्ती टीम को बिछिया-आंबा मार्ग से करीब दो किलोमीटर भीतर यह मादा हाथी मृत अवस्था में मिली। सूचना मिलते ही वन क्षेत्राधिकारी आशीष गौड़ ने उच्चाधिकारियों को अवगत कराया। मंगलवार सुबह दुधवा के मुख्य वन संरक्षक एच. राजा मोहन, प्रभागीय वनाधिकारी अपूर्व दीक्षित और एसडीओ समेत पूरा अमला मौके पर पहुंचा। सड़क किनारे गाड़ियां खड़ी कर टीम को पैदल दुर्गम जंगल पार कर घटनास्थल तक जाना पड़ा।
मौके पर ही तीन सदस्यीय चिकित्सकीय टीम डॉ. तल्हा और डॉ. दीपक समेत ने पोस्टमार्टम किया। इसके बाद विसरा सुरक्षित कर आईवीआरआई, बरेली भेजा गया और शव को जेसीबी से गड्ढा खोदकर दफना दिया गया। अधिकारियों के अनुसार मादा हाथी की उम्र 20 से 25 वर्ष के बीच है और शव लगभग एक सप्ताह पुराना प्रतीत हो रहा है। हालांकि, स्थानीय ग्रामीण इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि कई दिनों से जंगल से सटे इलाकों में तेज दुर्गंध फैल रही थी, जिससे आशंका है कि शव इससे कहीं अधिक समय से पड़ा था।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि इन दिनों क्षेत्र में हाथियों के झुंड सक्रिय हैं और टस्कर हाथियों का व्यवहार आक्रामक हो गया है। ऐसे में आपसी संघर्ष में मौत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। सबसे अहम सवाल यह है कि प्रतिबंधित और अति संवेदनशील कोर ज़ोन में पड़े इतने बड़े वन्यजीव के शव की जानकारी समय रहते वन विभाग को क्यों नहीं हो सकी? क्या गश्ती व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सीमित है? यदि नियमित निगरानी होती, तो यह घटना इतने दिनों तक छिपी नहीं रहती।
मंगलवार सुबह बिछिया-आंबा मार्ग पर वन विभाग की गाड़ियों का अचानक जमावड़ा देख ग्रामीणों में पहले किसी अनहोनी की आशंका बनी रही। बाद में जैसे ही मादा हाथी की मौत की खबर फैली, क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया। कुछ लोग इसे प्राकृतिक कारण बता रहे हैं, तो कई इसे संदिग्ध मानते हुए निष्पक्ष और गहन जांच की मांग कर रहे हैं।
प्रभागीय वनाधिकारी अपूर्व दीक्षित का कहना है कि प्रथम दृष्टया मामला स्वाभाविक मौत का प्रतीत होता है, लेकिन वास्तविक कारण विसरा रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल, कतर्नियाघाट के जंगल में हुई यह घटना कई अनुत्तरित सवाल छोड़ गई है क्या यह महज एक प्राकृतिक मौत है या इसके पीछे कोई छिपा हुआ कारण है? जवाब अब बरेली से आने वाली रिपोर्ट पर टिका है, लेकिन तब तक वन विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में बनी रहेगी।
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