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होठों पर बम बम... कंधों पर गंगा, कानपुर से महादेवा तक हाईवे भी बना तीर्थ
बाराबंकी में शिवरात्रि और फाल्गुनी मेले के पावन दिनों में आस्था ने ऐसा दृश्य रचा है, जिसे शब्दों में बांधना आसान नहीं। लोधेश्वर महादेवा की ओर बढ़ती कांवड़ यात्रा यह साबित कर रही है कि श्रद्धा जब संकल्प बन जाती है, तो दूरी, थकान और असमर्थता सब पीछे छूट जाते हैं। कानपुर के बिठूर से भरा गया गंगाजल आज किसी वाहन में नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं के कंधों पर सवार होकर हाईवे के रास्ते सीधा महादेवा तक पहुँच रहा है—कतारबद्ध, अनुशासित और बम-बम भोले के जयकारों के बीच।
छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, और यहां तक कि चलने-फिरने में असमर्थ श्रद्धालु भी—कोई बैसाखी के सहारे, तो कोई त्रिचक्री पर—सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा तय कर रहे हैं। हर कांवड़िए के चेहरे पर एक-सी चमक है, हर होंठ पर “बम-बम भोला” और हर कंधे पर गंगाजल। यही दृश्य इस बात का प्रमाण है कि आस्था केवल भावना नहीं, बल्कि अनुशासन और समर्पण की जीवित तस्वीर है।
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