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VIDEO : गढ़ा में भगवान बुद्ध ने किया था छह महीने का प्रवास, पूर्व चीनी यात्री ह्वेनसांग ने सिद्ध की थी इसकी प्रमाणिकता
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VIDEO : गढ़ा में भगवान बुद्ध ने किया था छह महीने का प्रवास, पूर्व चीनी यात्री ह्वेनसांग ने सिद्ध की थी इसकी प्रमाणिकता
सुल्तानपुर। शहर से सटे कुड़वार के गढ़ा का इतिहास है। बौद्धकाल में केशीपुत्र के नाम इसकी पहचान हुई, जो तेरहवीं शताब्दी तक कायम रहा। भगवान गौतम बुद्ध ने यहां छह माह का प्रवास कर कलामवंशी क्षत्रियों को उपदेश दिया था। 636 ईसा पूर्व चीनी यात्री ह्वेनसांग अपने भ्रमण के दौरान इसकी प्रमाणिकता को सिद्ध किया था। यही नहीं बौद्ध ग्रंथ कलामसुत्तपितक में वर्णित दस गणराज्यों में कुड़वार के गढ़ा का उल्लेख किया गया है। ग्रेंट कुड़वार के नाम से विख्यात गढ़ा गोमती नदी के किनारे स्थित है।
इतिहासकारों के मुताबिक गौतम बुद्ध काल 563 ईसा पूर्व से 483 ईसा पूर्व तक था। उस समय गढ़ा में कलाम वंशीय क्षत्रियों का यहां अधिपत्य हुआ करता था। इसी काल के दौरान गौतम बुद्ध यहां पहुंचे थे। उनसे प्रभावित होकर उन्होंने बौद्धधर्म अंगीकार कर लिया था। वर्तमान में मौजूद मिट्टी के टीलों में लगी लाखौरी ईंटें भी अपने इतिहास को बयां कर रही है। गांव के पुराने लोग बताते हैं कि पहले यहां बौद्ध सम्मेलन भी होता था, जिसमें चीन, जापान, थाईलैंड समेत देश-विदेश के बौद्ध भिक्षु पहुंचते थे। अब यह सिर्फ इतिहास की बात में रह गया है।
वर्ष 1985-86 में भारतीय पुरातत्व विभाग ने इसके ऐतिहासिक महत्व को समझा और यहां खोदाई कराई थी। खोदाई के दौरान भगवान बुद्ध की मूर्तियां व स्तूप के अवशेष भी मिले थे। इसे पर्यटन स्थल घोषित करने की योजना पर भी कार्य हुआ, लेकिन समय बीतने के साथ वह कागजों में ही सिमट कर रह गया है। ऐतिहासिक व पुरातनकाल की पहचान बना यह स्थल उपेक्षा का शिकार हो गया हैं। यहां पहुंचने के लिए पगडंडी का ही एकमात्र सहारा है। यही नहीं मिट्टी के टीले भी अब खेतों के रूप में दिख रहे है। प्राचीन कुएं का अस्तित्व भी समाप्त होने की कगार पर है।
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