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अमीर-गरीब सभी बच्चों को मिले समान शिक्षा', मांग के साथ बनारस में निकली तीन दिवसीय पदयात्रा, VIDEO
"चाहे अमीर की हो या गरीब की संतान, सबकी शिक्षा हो समान" के नारे के साथ सोमवार से वाराणसी में तीन दिवसीय पदयात्रा की शुरुआत हुई। मैगसेसे सम्मान से सम्मानित समाजसेवी डॉ. संदीप पांडे के नेतृत्व में निकली यात्रा का शुभारंभ मुंशी प्रेमचंद की जन्मस्थली लमही में आयोजित जनसभा से हुआ। यह पदयात्रा 13 से 15 जुलाई तक चलेगी और विभिन्न गांवों से होते हुए काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) पहुंचकर संपन्न होगी।
यात्रा के आयोजक नंदलाल मास्टर ने बताया कि पदयात्रा लमही से जनकवि सुदामा पांडेय 'धूमिल' के गांव खेवली, वहां से लोकबंधु राजनारायण के गांव गंजारी होते हुए बीएचयू पहुंचेगी। पहले दिन यात्रा लमही से बड़ालालपुर, नातिनियादाई, नवलपुर, तरना, खेवली और कोरौती तक पहुंची। खेवली में धूमिल की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया तथा नुक्कड़ सभा आयोजित हुई। जगह-जगह ग्रामीणों ने यात्रा का स्वागत किया।
लमही में आयोजित सभा में वक्ताओं ने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है, लेकिन आज भी शिक्षा व्यवस्था सामाजिक और आर्थिक असमानता को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा केवल संपन्न वर्ग तक सीमित होती जा रही है, जबकि गरीब, किसान और मजदूर परिवारों के बच्चे बेहतर शिक्षा से वंचित हैं। वक्ताओं ने मुंशी प्रेमचंद और महात्मा गांधी की शिक्षा संबंधी सोच का उल्लेख करते हुए समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सभा में वर्ष 1968 के कोठारी आयोग की कॉमन स्कूल सिस्टम संबंधी सिफारिशों को लागू करने की मांग उठाई गई। साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट के वर्ष 2015 के उस फैसले को लागू करने की मांग की गई, जिसमें सरकारी वेतन पाने वाले कर्मचारियों के बच्चों की पढ़ाई सरकारी विद्यालयों में कराने का सुझाव दिया गया था। वक्ताओं ने कहा कि इससे सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार होगा और गरीब बच्चों को भी समान अवसर मिल सकेंगे।
यात्रा के दौरान दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा संबंधी मांगों को लेकर चल रहे धरने के प्रति समर्थन जताते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग की गई। पदयात्रा में डॉ. संदीप पांडे, नंदलाल मास्टर, फादर आनंद, फादर प्रवीण, रामजनम यादव, अजित गौरव, आजाद गौतम, मनीष पटेल, सुनील सिंह सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग शामिल रहे।
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