नर्मदापुरम जिले के इटारसी क्षेत्र से इंसान और उसके पालतू साथी की वफादारी की मिसाल पेश करने वाली एक सनसनीखेज घटना सामने आई है। केसला ब्लॉक के सुखतवा वन क्षेत्र में गाय को घर लाने गए 16 वर्षीय छात्र पर अचानक भालू ने हमला कर दिया। कुछ ही पलों में हालात इतने भयावह हो गए कि उसकी जान पर बन आई, लेकिन उसके साथ मौजूद पालतू कुत्ते ने बहादुरी दिखाते हुए भालू का सामना किया और उसे पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।
घायल विकलेश कासदे, कक्षा 11वीं का छात्र है। उसके मुताबिक, वह छिंदापानी भिलाट देव जंगल में परिवार की गाय तलाशने गया था। इसी दौरान घनी झाड़ियों में छिपा एक भालू अचानक बाहर निकला और बिना किसी चेतावनी के उस पर हमला कर दिया। हमले के कारण वह जमीन पर गिर गया और संभलने का मौका भी नहीं मिला।
बताया जा रहा है कि भालू ने करीब पांच मिनट तक लगातार पंजों और दांतों से उस पर हमला किया। इस दौरान विकलेश के पेट और पैर में गंभीर चोटें आईं। तभी उसका पालतू कुत्ता आगे आया और लगातार भौंकते हुए भालू पर झपट पड़ा। कुत्ते के आक्रामक रवैये से घबराकर भालू जंगल की ओर भाग गया।
पढ़ें: पचोर-खुजनेर रोड पर कार नाले में गिरी, चार लोगों की मौके पर मौत; जांच शुरू
भालू के भागने के बाद घायल छात्र ने किसी तरह अपने पिता को फोन कर घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे तथा उसे तत्काल इटारसी के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी शासकीय अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसके गहरे घावों पर 30 टांके लगाए। चिकित्सकों के अनुसार अब उसकी हालत खतरे से बाहर है और उपचार के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
वहीं, घायल छात्र की मां सुनीता ने वन विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि घटना के बाद विभाग का कोई भी अधिकारी या कर्मचारी उनके बेटे का हालचाल जानने नहीं पहुंचा। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक परिवार को किसी प्रकार की आर्थिक सहायता या राहत भी नहीं मिली है। उन्होंने वन विभाग से मुआवजा देने और जंगल से लगे गांवों में वन्यजीवों की निगरानी बढ़ाने की मांग की है।
गौरतलब है कि इटारसी और केसला क्षेत्र में इससे पहले भी भालू के हमलों की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बार-बार ऐसी घटनाएं होने के बावजूद वन विभाग की ओर से पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल से लगे गांवों में रहने वाले, विशेषकर आदिवासी समुदाय के लोग, रोजी-रोटी और मवेशियों के लिए जंगल जाने को मजबूर हैं। ऐसे में उनका अक्सर जंगली जानवरों से सामना होता है और वे हमलों का शिकार बनते हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग से संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने, वन्यजीवों की निगरानी तेज करने और प्रभावित परिवारों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।