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VIDEO: कतर्नियाघाट पर्यटन में नई जान फूंक सकता है गूढ़–हरखापुर–सुजौली मार्ग, पर्यटकों को 45 किलोमीटर जंगल में नहीं जाना पड़ेगा
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VIDEO: कतर्नियाघाट पर्यटन में नई जान फूंक सकता है गूढ़–हरखापुर–सुजौली मार्ग, पर्यटकों को 45 किलोमीटर जंगल में नहीं जाना पड़ेगा
मिहींपुरवा (बहराइच)। कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य से सटे क्षेत्रों के लिए गूढ़–हरखापुर–सुजौली मार्ग किसी जीवनरेखा से कम नहीं है। लगभग 30 किलोमीटर लंबी यह सड़क यदि पूर्ण रूप से बन जाए तो यह न सिर्फ स्थानीय लोगों के लिए राहत का मार्ग साबित होगी, बल्कि कतर्नियाघाट के पर्यटन को भी नई उड़ान दे सकती है।
इस मार्ग के बन जाने से बहराइच और लखीमपुर खीरी की ओर से आने वाले पर्यटकों को अब 45 किलोमीटर लंबे जंगल के भीतर से नहीं गुजरना पड़ेगा, जिससे जंगल के अंदर ध्वनि और वायु प्रदूषण में कमी आएगी तथा वन्यजीवों के प्राकृतिक वास में भी खलल नहीं पड़ेगा।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस मार्ग से पहले तक करीब दो लाख की आबादी का आवागमन होता था। सड़क के दोनों किनारों के हिस्से को पहले ही डामर से पक्का किया जा चुका है। त्रिमुहानी पुल से गूढ तक तथा सुजौली वन सीमा तक लगभग 23 किलोमीटर के दोनों किनारे पहले बने थे, जबकि शेष 7 किलोमीटर वन भूमि पर खण्डजा मार्ग के रूप में था।
पिछले वर्ष की बरसात में त्रिमुहानी नाले के पास सड़क कट जाने से लगभग 5–6 फीट पानी भर गया, जिससे आवागमन पूरी तरह ठप हो गया। मजबूरी में ग्रामीण अब 100 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाते हैं, जिसमें 45 किलोमीटर का दुर्गम वन क्षेत्र भी शामिल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस रास्ते पर कभी 5 से 6 बसें और छोटे वाहन मोटर साइकिल साइकिल तथा पैदल नियमित रूप से चलते थे, लेकिन अब रास्ता बंद होने से आठ से दस दर्जन गांव पूरी तरह अलग-थलग पड़ गये है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वन विभाग इस सड़क के निर्माण में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। विभाग वन भूमि पर सड़क निर्माण की अनुमति नहीं देता, जिसके चलते वर्षों से यह मार्ग अधूरा है।
हालांकि, वन विभाग का कहना है कि यह मार्ग कतर्नियाघाट के सुजौली वन रेंज क्षेत्र के कोर जोन से होकर गुजरता है, और एनसीटीई (राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण) के दिशा-निर्देशों के अनुसार कोर जोन में नई सड़क निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती।
फिर भी, स्थानीय ग्रामीणों का मानना है कि यदि सरकार इस मार्ग का पर्यावरणीय दृष्टि से अनुकूल पुनर्निर्माण कराए, तो इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और इस क्षेत्र के करीब पचास हजार लोगों को रोजगार के अवसर भी प्राप्त हो सकते हैं।
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