{"_id":"69eb44c7584d4b839f0cdc17","slug":"video-brabka-ka-tapara-ka-jabna-kacaga-naha-anashasana-bnata-ha-tapara-sashal-madaya-sabsa-bugdha-bthha-2026-04-24","type":"video","status":"publish","title_hn":"बाराबंकी के टॉपरों की जुबानी, कोचिंग नहीं, अनुशासन बनाता है टॉपर, सोशल मीडिया सबसे बड़ी बाधा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बाराबंकी के टॉपरों की जुबानी, कोचिंग नहीं, अनुशासन बनाता है टॉपर, सोशल मीडिया सबसे बड़ी बाधा
यूपी बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा में पहला, दूसरा व तीसरा स्थान पाने वाली बाराबंकी की तीनों टॉपर्स ने अपनी सफलता की चमक के पीछे का सच उजागर किया है। यह सच है न कोचिंग, न शॉर्टकट... सिर्फ मेहनत, अनुशासन और सोशल मीडिया से दूरी। अमर उजाला से खास बातचीत में प्रदेश की टॉप-थ्री छात्राओं ने न सिर्फ अपनी सफलता का राज का राज खोला, बल्कि शिक्षा व्यवस्था पर भी सीधी चोट की। संवाद
प्रदेश में पहला स्थान हासिल करने वाली मॉडर्न एकेडमी इंटर कॉलेज की छात्रा अंशिका वर्मा ने साफ शब्दों में कहा कि टॉप करने का कोई शॉर्टकट नहीं होता। उनके मुताबिक, अगर छात्र शिक्षक की बातों को गंभीरता से समझें और खुद पर भरोसा रखें, तो बिना कोचिंग के भी नंबर एक बना जा सकता है। अंशिका ने शिक्षा व्यवस्था पर भी बेबाक राय रखी। कहा कि सरकारी स्कूलों की स्थिति में सुधार बेहद जरूरी है, ताकि वहां पढ़ने वाले छात्रों को भी बेहतर माहौल और संसाधन मिल सकें। उन्होंने बताया कि मेरिट में आने का लक्ष्य था, लेकिन प्रदेश में पहला स्थान मिलेगा यह नहीं सोचा था।
प्रदेश में दूसरा स्थान पाने वाली अदिति ने सीधे तौर पर सोशल मीडिया को स्टूडेंट्स का सबसे बड़ा दुश्मन करार दिया। उन्होंने कहा कि आज का छात्र जितना समय मोबाइल स्क्रीन पर खर्च करता है, उतना अगर किताबों को दे दे, तो रिजल्ट खुद बोलने लगेंगे। अदिति ने पढ़ाई के घंटों पर भी बड़ा संदेश दिया। कहा कि घंटों बैठना जरूरी नहीं, सही तरीके से पढ़ना जरूरी है। उनके मुताबिक, रोजाना चार से पांच घंटे की ईमानदार और फोकस्ड पढ़ाई ही सफलता की असली कुंजी है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे खुद से सवाल करें कि क्या वे अपनी तैयारी से संतुष्ट हैं...? यही सवाल उन्हें आगे बढ़ाएगा।
बहुत प्रदेश में 10वीं में तीसरे स्थान पर रहीं परी वर्मा ने शिक्षा को हर समस्या का सबसे मजबूत समाधान बताया। उन्होंने कहा कि टॉपर बनने की उम्मीद नहीं थी, लेकिन लगातार मेहनत और शिक्षकों के मार्गदर्शन ने उनकी किस्मत बदल दी। परी का फोकस साफ था कि कम पढ़ो, लेकिन समझकर पढ़ो। वह रोजाना चार से पांच घंटे पढ़ाई करती थीं और कोशिश रहती थी कि जो भी पढ़ें, उसे पूरी तरह आत्मसात करें। उनके अनुसार अगर इरादे मजबूत हों, तो संसाधनों की कमी भी रास्ता नहीं रोक सकती।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।