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Budaun News: टीईटी अनिवार्यता के विरोध में प्रदर्शन, शिक्षकों ने चलाया हैशटैग अभियान
उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए सेवा में बने रहने हेतु टीईटी अनिवार्य किए जाने के फैसले के बाद शिक्षकों में रोष व्याप्त है। इस निर्णय के विरोध में विभिन्न शिक्षक संगठनों ने टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले हैशटैग अभियान चलाया। शिक्षकों के हैशटैग अभियान की वजह से मन की आवाज कार्यक्रम दूसरे नंबर पर आ गया। बदायूं में टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय सचिव एवं उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष व प्रांतीय प्रचार मंत्री संजीव शर्मा के नेतृत्व में दोपहर दो बजे से चार बजे तक एक्स (पूर्व नाम ट्विटर) पर हैशटैग अभियान संचालित किया गया। संजीव शर्मा ने बताया कि शिक्षकों द्वारा चलाया गया यह अभियान सोशल मीडिया पर पहले स्थान पर ट्रेंड करता रहा और इसने मन की बात को भी पीछे छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि इससे शिक्षकों का आक्रोश और असंतोष साफ तौर पर दिखाई देता है। शिक्षक संगठनों ने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की। जिला महामंत्री उदयवीर सिंह यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला उन शिक्षकों के साथ अन्याय है। जो वर्षों से ईमानदारी से सेवा दे रहे हैं। 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता थोपना व्यावहारिक नहीं है। जिला कोषाध्यक्ष सुशील चौधरी ने कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों की नौकरी को संकट में डालना दुर्भाग्यपूर्ण है। टीईटी की अनिवार्यता से हजारों परिवारों की आजीविका पर असर पड़ेगा। सीनियर बेसिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अरविंद सिंह राठौड़ ने कहा कि शिक्षक समाज में शिक्षा की रीढ़ होते हैं। उनके साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। कहा कि शिक्षकों की आवाज मन की बात से भी आगे निकल जाना यह साबित करता है कि मामला कितना गंभीर है। जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष प्रेमानंद शर्मा ने कहा कि यह फैसला शिक्षकों के मनोबल को तोड़ने वाला है। सरकार को अनुभव और सेवा अवधि को प्राथमिकता देनी चाहिए। हैशटैग अभियान के माध्यम से शिक्षकों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वे अन्याय के खिलाफ संगठित हैं और जब तक समाधान नहीं होगा, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
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