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गोंडा में घर में खड़ी बाइक, अयोध्या में कट गया चालान
गोंडा में डिजिटल व्यवस्था के दौर में भी एक मजदूर के लिए सिस्टम की खामी बड़ी मुसीबत बन गई है। कटरा बाजार के सर्वांगपुर गोड़ियन पुरवा निवासी राधेश्याम की बाइक घर पर खड़ी रहती है, लेकिन उसके नाम पर अयोध्या में बार-बार चालान कट रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि वह दिल्ली में रहकर मजदूरी करते हैं और बाइक का उपयोग भी नहीं होता, फिर भी चालान का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।
राधेश्याम बुधवार को अपनी फरियाद लेकर संभागीय परिवहन कार्यालय पहुंचे। उन्होंने बताया कि चालान का स्टेटस चेक करने पर पता चलता है कि किसी दूसरी बाइक पर उनके नंबर की फर्जी प्लेट लगाकर इस्तेमाल किया जा रहा है। उनकी बाइक ‘सुपर स्प्लेंडर’ नहीं है, फिर भी उसी मॉडल की गाड़ी पर नंबर प्लेट दिखाकर चालान काटे जा रहे हैं। पीड़ित का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है।
वर्ष 2024 से वह इस झंझट में फंसे हैं। कभी पुलिस, कभी परिवहन और कभी यातायात कार्यालय, हर जगह गुहार लगाने के बाद भी समाधान नहीं निकल पाया। कटरा बाजार थाने में शिकायत की तो 1076 पर कॉल करने की सलाह मिली। मुख्यमंत्री कार्यालय में ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन नतीजा सिफर रहा। यातायात पुलिस ने उन्हें आरटीओ कार्यालय भेजा, जबकि आरटीओ से अयोध्या जाकर शिकायत दर्ज कराने की बात कही गई।
राधेश्याम कहते हैं, “जहां-जहां चालान कटेगा, वहां-वहां कैसे जाऊं? दिल्ली में मजदूरी कर परिवार पालते हैं, हर बार छुट्टी लेकर भटकना संभव नहीं। संभागीय परिवहन कार्यालय के एआरटीओ आरसी भारतीय ने संभावना जताई कि नंबर प्लेट में अंग्रेजी अक्षर ‘वी’ को ‘वाई’ की तरह लिखे जाने के कारण तकनीकी त्रुटि हो रही है, जिससे गलत चालान जनरेट हो रहा है।
उन्होंने समाधान के लिए अयोध्या यातायात कार्यालय में संपर्क करने की सलाह दी। वहीं राधेश्याम का कहना है कि जब दोनों वाहन गोंडा में ही पंजीकृत हैं, तो संबंधित वाहन मालिक को नोटिस भेजकर जांच कराई जा सकती है। उनका सवाल है कि आखिर आम आदमी कब तक सिस्टम की खामियों का बोझ उठाता रहेगा।
अधिवक्ता कृष्णानंद मिश्र का कहना है कि यह मामला न केवल फर्जी नंबर प्लेट के खतरे की ओर इशारा करता है, बल्कि डिजिटल चालान व्यवस्था की सटीकता पर भी सवाल खड़े करता है। अब देखने वाली बात होगी कि जिम्मेदार विभाग इस पीड़ित को कब राहत दिला पाते हैं।
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