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रायबरेली: हजारों परिवारों की रोजी रोटी से जुड़ा है स्थानीय बाजार, बिक्री घटने से दुकानदारों की बढ़ी चिंता
रायबरेली: मोबाइल की एक क्लिक पर सामान घर पहुंचने लगा है। ऑनलाइन बाजार ने खरीदारी का तरीका बदल दिया है। इसका असर अब नगर के स्थानीय फुटकर कारोबार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। दुकानदारों के मुताबिक ऑनलाइन खरीदारी बढ़ने से उनकी बिक्री घटी है। मुनाफा कम हुआ है और दुकान के खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है। नगर में करीब 2500 फुटकर और थोक दुकानदार हैं। व्यापारियों के मुताबिक इनसे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 15 हजार परिवारों की रोजी रोटी जुड़ी है। ऐसे में स्थानीय कारोबार में आई कमी का असर केवल दुकानदारों तक सीमित नहीं है।
दुकानदार विमल गुप्ता कहते हैं कि कपड़ा और कॉस्मेटिक कारोबार पर ऑनलाइन बाजार का असर अधिक है। ग्राहक घर बैठे कई कंपनियों के सामान और कीमतों की तुलना कर लेते हैं। पसंद आने पर मोबाइल से ही ऑर्डर कर देते हैं। इससे बाजार तक ग्राहक के पहुंचने की जरूरत कम हो गई है। कपड़ा व्यवसायी इंद्रेश सिंह कहते हैं कि ऑनलाइन ट्रेडिंग बढ़ने के बाद स्थानीय बाजार में ग्राहकों की संख्या में कमी आई है। पहले लोग कपड़ा देखने और पसंद करने के लिए दुकान पर आते थे। अब कई लोग मोबाइल पर ही विकल्प तलाश लेते हैं। थोक कारोबारी दीपचंद्र गुप्ता का कहना है कि बिक्री घटने का असर कर्मचारियों पर भी पड़ा है। थोक की कई दुकानों पर पहले पांच पांच कर्मचारी काम करते थे। कारोबार कम होने पर कुछ दुकानदारों को कर्मचारियों की संख्या घटानी पड़ी। सरदार सतपाल सिंह पालू कहते हैं ग्राहकों का नजरिया भी बदला है। कुछ ग्राहकों का कहना है कि ऑनलाइन खरीदारी में घर बैठे सामान मिल जाता है और कई बार कीमत भी कम दिखाई देती है। वहीं स्थानीय बाजार में सामान खरीदने वाले ग्राहक विवेक कहते हैं कि दुकान पर सामान देखकर, छूकर और गुणवत्ता परखकर खरीदने का भरोसा अलग है। खराब सामान होने पर दुकानदार से सीधे संपर्क भी किया जा सकता है।
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के नगर अध्यक्ष विवेक शर्मा कहते हैं कि संगठन ऑनलाइन ट्रेडिंग के खिलाफ अभियान चला चुका है। कई बार भारत सरकार को ज्ञापन देकर ऑनलाइन व्यापार को रेगुलेट करने की मांग की गई है। व्यापारी नेता राहुल भदौरिया कहते हैं कि ऑनलाइन कारोबार बढ़ने से फुटकर व्यापार प्रभावित हुआ है। बिक्री कम होने के कारण दुकानदारों के सामने किराया, बिजली और कर्मचारियों का खर्च निकालना चुनौती बन गया है।व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन बाजार को पूरी तरह रोकना समाधान नहीं है। जरूरत स्थानीय दुकानदारों को समान अवसर देने और व्यापार के लिए नियम बनाने की है। क्योंकि नगर की बाजार में केवल खरीद बिक्री ही नहीं होती है बल्कि इससे हजारों परिवारों की आजीविका भी जुडी है।
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