पंडेवार गांव में शनिवार रात ग्रामीणों ने लौह अयस्क तस्करी का भंडाफोड़ किया। उन्होंने दो ट्रक और एक जेसीबी मशीन पकड़वाई। सूचना के बाद वन विभाग और पुलिस ने गाड़ियां जब्त कर लीं। हालांकि, 24 घंटे बाद भी विभाग के पास वाहन मालिकों की जानकारी नहीं थी। चालकों के बारे में भी कोई सूचना नहीं मिली।
जब्ती के करीब 24 घंटे बाद तक विधिवत कार्रवाई नहीं हुई। इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों के अनुसार शनिवार रात करीब 8 बजे सूचना मिली थी। गांव के पास जेसीबी मशीन से ट्रकों में अवैध लौह अयस्क भरा जा रहा था। इसकी जानकारी वन विभाग और पुलिस को दी गई। टीम करीब 10 बजे मौके पर पहुंची और दो 14 चक्का ट्रक तथा एक जेसीबी मशीन जब्त की। रविवार सुबह से दोपहर तक वन विभाग कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं कर पाया। देर शाम तक अधिकारियों के पास जब्त ट्रकों के मालिक और चालकों की जानकारी नहीं थी। मीडिया द्वारा लगातार जानकारी मांगने के बाद विभाग ने आगे की कार्रवाई शुरू की है।
‘आलू माल’ का अवैध कारोबार
पंडेवार और आसपास की पहाड़ियों में लौह अयस्क के लम्प्स बड़ी मात्रा में मिलते हैं। इनका आकार आलू जैसा होने के कारण स्थानीय लोग इन्हें ‘आलू माल’ कहते हैं। ग्रामीण बताते हैं कि मजदूर इन्हें पहाड़ियों से नीचे उतारते हैं। फिर सड़क किनारे या सुनसान स्थानों पर जमा किया जाता है। रात में जेसीबी और अन्य मशीनों से ट्रकों में भरकर बाहर भेज दिया जाता है। यह अवैध माल स्पंज आयरन संयंत्रों और आयरन क्रशरों तक पहुंचता है।
लाखों का भुगतान और कारोबार का विस्तार
एनएमडीसी लौह अयस्क के लम्प्स करीब 8300 रुपये प्रति टन की दर से बेचता है। स्थानीय स्तर पर तस्करों से यही माल करीब 4000 रुपये प्रति टन में खरीदा जाता है। एक ट्रक में 40 से 50 टन तक अयस्क भरा जाता है। यानी एक ट्रक के बदले तस्करों को डेढ़ से दो लाख रुपये तक मिल जाते हैं। यही वजह है कि बैलाडीला से लगे पंडेवार और फरसपाल क्षेत्र में यह अवैध कारोबार बढ़ रहा है। बैलाडीला की पहाड़ियों से लेकर गंगालूर तक यह लम्प्स पहाड़ों पर बिखरा पड़ा है।
यह पहला मामला नहीं है जब अवैध लौह अयस्क परिवहन पकड़ा गया है। करीब दो वर्ष पूर्व भी दो ट्रक और एक पोकलेन मशीन जब्त की गई थी। उस समय भी कार्रवाई हुई थी, लेकिन बाद में वाहन छोड़ दिए गए थे। इसलिए इस बार ग्रामीणों की नजर है कि वन विभाग केवल औपचारिक कार्रवाई करता है या वाहनों को राजसात करता है। अवैध परिवहन में वाहन जब्ती के साथ राजसात करने का भी प्रावधान है। वन अधिनियम 1927 के तहत दोष सिद्ध होने पर तीन से सात साल तक की सजा हो सकती है। दंतेवाड़ा के डीएफओ रंगानाधा रामकृष्णा वाय ने बताया कि मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
लौह अयस्क के साथ पकड़ी गई ट्रक- फोटो : credit
लौह अयस्क के साथ पकड़ी गई ट्रक- फोटो : credit