मध्यप्रदेश में बीते दिनों हुए 18वें लोकसभा चुनाव में खंडवा लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी की ओर से मौजूदा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने जीत दर्ज कराई थी। वहीं, चुनाव के समय से ही भाजपा प्रत्याशी के सामने चुनाव लड़ रहे, पराजित कांग्रेस प्रत्याशी नरेंद्र पटेल ने सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल के निर्वाचन को शून्य घोषित किये जाने की मांग की थी। इसको लेकर स्थानीय निर्वाचन अधिकारी को बताया गया था कि पाटिल ने नामांकन पत्र के साथ दिए शपथ पत्र में बैंक के लोन में डिफाल्टर होने की जानकारी छुपाई थी। इस तथ्य को आधार बनाकर कांग्रेस प्रत्याशी और याचिकाकर्ता नरेंद्र पटेल ने हाईकोर्ट जबलपुर में 19 जुलाई को एक प्रकरण भी दर्ज करवाया था। उसी मामले की चौथी सुनवाई के समय हाईकोर्ट ने इस पिटीशन पर एक्शन लेते हुए सिटीजन सहकारी बैंक बुरहानपुर के चीफ एग्जीक्यूटिव का नोटिस जारी किया है।
सांसद पाटिल के लोन डिफाल्टर होने का यह है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल को साल 2015-16 में करीब 71 लाख रुपये के लोन की किस्त राशि सिटीजन को ऑपरेटिव बैंक बुरहानपुर को देनी थी। ठीक उसी समय ज्ञानेश्वर पाटिल बैंक समिति के मौजूदा पदाधिकारी भी थे, लेकिन लोन की राशि तय समय निकल जाने के बाद भी बकाया रहने के चलते, उस समय के बैंक के अभिकर्ताओं की शिकायत पर मौजूदा सांसद पाटिल को बैंक का डिफॉल्टर घोषित किया गया था। यही नहीं उन्हें उनके पद से भी हटा दिया गया था। तभी से लोन की वह राशि सांसद पाटिल के नाम पर सिटिजन कोऑपरेटिव बैंक मे कर्ज के रूप में बकाया है।
चौथी सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जारी किए नोटिस
चुनाव निर्वाचन अधिकारी को सांसद पाटिल की जो शिकायत की गई थी, उसमें बताया गया था कि उनके समक्ष प्रस्तुत नामांकन पत्र में पाटिल ने लोन की जानकारी दर्ज नहीं की है। इसी चुनावी आपत्ति को आधार बनाकर कांग्रेस प्रत्याशी नरेंद्र पटेल ने 19 जुलाई को जबलपुर हाईकोर्ट में एक पिटीशन दायर की थी। इस पिटीशन की सुनवाई 13 अगस्त, 4 सितंबर और 18 सितंबर को पहले भी हो चुकी थी। जिसके बाद हुई चौथी सुनवाई के बाद अब कोर्ट ने सिटीजन को ऑपरेटिव बैंक बुरहानपुर के चीफ एग्जीक्यूटिव को नोटिस जारी करते हुए यह आदेश दिया है कि आगामी 8 नवंबर को बीजेपी के ज्ञानेश्वर पाटिल द्वारा लिए गए लोन के संपूर्ण दस्तावेज लेकर कोर्ट में हाजिर होना है।
सांसद ने जानबूझकर जमा नहीं किये 71 लाख रुपये
इधर, जबलपुर हाइकोर्ट से कोऑपरेटिव बैंक के चीफ एक्जीक्यूटिव को नोटिस जारी होने के बाद कांग्रेस के खेमे में भाजपा प्रत्याशी का चुनाव निरस्त होने की उम्मीद की किरण दिखाई दी है। इस पर कांग्रेस प्रत्याशी नरेंद्र पटेल ने बताया कि देश में आज भी न्याय प्रक्रिया पारदर्शी है। सत्ता पक्ष के सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल को सरकारी बैंक की राशि तीन किस्तों में भुगतान करना था। मगर लगभग 8 साल बीत जाने के बाद भी उनके द्वारा जानबूझकर करीब 71 लाख रुपये की राशि जमा नहीं की गई और उन्होंने निर्वाचन आयोग से भी इसे छुपाया है। अब न्यायालय प्रक्रिया के बाद निश्चित ही यह सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल के लिए मुश्किल खड़ी करेगा, और उनके चुनाव को शुन्य भी घोषित कर सकेगा।