मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के एक बयान से कांग्रेस पार्टी को सत्ताधारी दल पर पलटवार करने का मौका मिल गया है। विजयवर्गीय द्वारा सरकार की बनाई सड़कों और लाड़ली बहना जैसी योजनाओं से दूर रहने की सीख देने पर प्रदेश के खंडवा जिले से कांग्रेस नेत्री और टीम राहुल गांधी की सदस्य प्रतिभा रघुवंशी ने इस मामले में सीएम मोहन यादव पर जमकर हमला बोला है।
कांग्रेस नेत्री प्रतिभा रघुवंशी का कहना था कि भारतीय जनता पार्टी का हमेशा से यही रवैया रहा है कि संविधान की मूल आत्मा को जाति और धर्म के नाम पर खंडित किया जाए। समय-समय पर ऐसे जाति या धर्म से जुड़े शब्दों का उपयोग, चाहे वह 'काफिर' हो या 'जिहादी', किया जाता रहा है। जबकि यह देश किसी भी चुने हुए प्रतिनिधि को इस तरह की इजाजत नहीं देता। चुनाव जीतने तक आप किसी पार्टी के नेता हो सकते हैं, लेकिन शपथ लेने के बाद आप इस देश के चुने हुए जनप्रतिनिधि होते हैं। ऐसे में किसी मंत्री द्वारा इस तरह की बात करना संविधान पर हमला है, जो भारतीय जनता पार्टी की कार्यशैली को दर्शाता है।
यही नहीं, कांग्रेस की राष्ट्रीय नेता प्रतिभा रघुवंशी ने आगे कहा कि ये लोग संविधान बदलना चाहते हैं। ये जाति और धर्म के नाम पर झगड़े करवाना चाहते हैं। वहीं, लाड़ली बहना योजना को लेकर उन्होंने कहा कि यह योजना चुनी हुई सरकार का वादा था। लाड़ली बहनों को कोई भीख नहीं दी जा रही है। हम ही लोग हैं जो टैक्स का पैसा सरकार को देते हैं। आज महंगाई इतनी बढ़ गई है कि एक महिला रसोई गैस संभाले या दूसरा घरेलू सामान खरीदे। ऐसे में सरकार जो सहायता राशि दे रही है, वह कोई भीख नहीं, बल्कि जनता के पैसे का ही उपयोग है।
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इस तरह प्रतिभा रघुवंशी ने कहा कि वे कांग्रेस की नेता होने के नाते मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा कही गई बातों का कड़ा विरोध करती हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि धर्म और जाति के आधार पर भेदभाव कर सरकार अपनी योजनाओं से किसी भी वर्ग की महिलाओं को बाहर करने की बात न करे, क्योंकि इससे कहीं न कहीं आपकी सोच में फिरकापरस्ती जैसी मानसिकता उजागर होती है।
बता दें कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान 'काफिर' शब्द पर अपनी कड़ी आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि भाजपा सरकार बिना किसी भेदभाव के सबके विकास के लिए काम करती है। यदि कुछ लोग हमें काफिर मानते हैं, तो उन्हें सरकार द्वारा बनाई गई सड़कों और 'लाड़ली बहना' जैसी योजनाओं का लाभ भी नहीं लेना चाहिए।