धरती की उत्पत्ति कब और कैसे हुई, भूकंप कैसे आते हैं। इस पर कब और कितने जानवर रहे और मानव की उत्पत्ति कैसे हुई। यह सब आपको जानना है तो आप एशिया के एक मात्र जिओ साइंस म्यूजियम ग्वालियर में जाकर देख सकते हैं। इसका उद्घाटन आज भारत के उपराष्ट्रपति करने जा रहे हैं।
विज्ञान के क्षेत्र में ग्वालियर को आज एक बड़ी सौगात मिलने जा रही है और यह सौगात केवल ग्वालियर ही नहीं, बल्कि एशिया के सबसे बड़ी भूविज्ञान संग्रहालय के रूप में मिलने जा रही है। ग्वालियर में लगभग 35 करोड़ की राशि से देश का पहला जिओ साइंस म्यूजियम बनकर तैयार हो गया है। इस म्यूजियम का उद्घाटन 15 दिसंबर को देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ करने जा रहे हैं। ये म्यूजियम देश में एकदम अनूठा है। इसमें भूगर्भ से जुड़े कई रहस्य भी उजागर होंगे।
महाराज बाड़े की खूबसूरत इमारत विक्टोरिया मार्केट के नए भवन में यह संग्रहालय बनाया गया है, जिसका नाम अब जिओ साइंस म्यूजियम हो गया है। इस म्यूजियम में दो गैलरी बनाई गई है। इनमें से एक गैलरी एवोल्यूशन ऑफ अर्थ और दूसरी गैलरी एवोल्यूशन ऑफ लाइफ पर केंद्रित है, जिसमें पृथ्वी का जन्म, डायनासौर का दौर, पृथ्वी का सेंट्रल कोर, दुनिया भर के बेशकीमती जेम्स स्टोन से जुड़ी जानकारियां मिल सकेंगी। इसमें ज्वालामुखी से लेकर भूगर्भ की तमाम जिज्ञासाओं का समाधान हो सकेगा।
वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था
इस दौरान एयरपोर्ट से लेकर कार्यक्रम स्थलों तक करीब 27.4 किलोमीटर के रूट से वीवीआईपी का काफिला गुजरेगा। प्रशासनिक तंत्र ने पूरी ताकत झोंक दी कि इस रूट पर कोई खामी न रहे।
सात दिन में एक हजार से अधिक कर्मचारी लगा दिए, ताकि इस रूट पर शहर की चमक दिखती रही। बीते सात दिनों में अफसरों से लेकर जिला प्रशासन, नगर निगम व स्मार्ट सिटी की ओर से पूरा अमला झोंक दिया गया। एयरपोर्ट से महाराजबाड़ा तक 16 किमी, बाड़ा से जीवाजी विवि तक सात किमी और जेयू से जयविलास तक 4.4 किमी सहित 27.4 किमी तक के मार्ग को चकाचक कर दिया गया है।