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नहर में पानी न छोड़े जाने से किसानों में आक्रोश, धान की खेती पर मंडराया संकट, VIDEO
बलुआ करनाल से निकलने वाली सिंचाई नहर में पानी न छोड़े जाने के कारण टांडाकला क्षेत्र के कैथी, फूलवरिया, पहाड़पुर, मटियरा, महुवर, हर्धन समेत दर्जनों गांवों के किसानों की धान की खेती संकट में आ गई है। किसानों का कहना है कि जुलाई का महीना चल रहा है, जो धान की रोपाई के लिए सबसे उपयुक्त समय होता है, लेकिन नहर में पानी न होने से खेत सूखे पड़े हैं। वहीं लगातार बारिश न होने के कारण सिंचाई के वैकल्पिक साधन भी असफल हो रहे हैं। कैथी गांव की नहर पूरी तरह सूखी पड़ी है। खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं और किसानों को भारी नुकसान की आशंका सताने लगी है। गांव के किसान महेंद्र तिवारी और ज्ञानधर तिवारी ने बताया कि हर साल इसी समय नहर में पानी छोड़ा जाता है, जिससे खेती संभव हो पाती है, लेकिन इस बार अब तक कोई व्यवस्था नहीं की गई। उनका कहना है कि सिंचाई विभाग और प्रशासन की उदासीनता से किसानों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। किसानों ने बताया कि नहर के भरोसे ही क्षेत्र के हजारों बीघा खेतों की सिंचाई होती है। यदि समय रहते पानी नहीं मिला तो धान की फसल सूखने के कगार पर पहुंच जाएगी, जिससे अन्न संकट जैसे हालात बन सकते हैं। इस बार मानसून भी किसानों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा है। अब तक क्षेत्र में नाममात्र की बारिश हुई है, जिससे खेतों की नमी भी खत्म हो चुकी है। ऐसे में किसान न तो धान की रोपाई कर पा रहे हैं और न ही खेतों में कोई तैयारी आगे बढ़ा पा रहे हैं।
किसानों ने प्रशासन और सिंचाई विभाग के अधिकारियों से मांग की है कि तत्काल नहर में पानी छोड़ा जाए, ताकि धान की फसल बचाई जा सके। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही समाधान नहीं किया गया तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन करने को मजबूर होंगे।क्षेत्रीय किसान संगठनों ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है और संबंधित विभागों से बातचीत शुरू कर दी है। जल्द ही इस विषय पर एक ग्राम सभा या धरना-प्रदर्शन की रूपरेखा तय की जा सकती है।
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