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VIDEO: नेपालगंज बागेश्वरी मंदिर में अष्टमी पर विशेष पूजा-अर्चना, उमड़े सीमांचल के श्रद्धालु
रूपईडीहा (बहराइच)। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित नेपालगंज (बांके) का बागेश्वरी मंदिर नवरात्रि में आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी पर मंगलवार को यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। वैदिक मंत्रोच्चार और परंपरागत विधि-विधान के बीच मां बागेश्वरी की विशेष पूजा-अर्चना हुई।
धार्मिक महत्व: आचार्य दयाशंकर शुक्ल ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार मां पार्वती की जिभ्या इसी मंदिर में गिरी थी। विशेष प्रकार के खुला दर्शन के अवसर पर पुजारी द्वारा रूई मोटी बत्ती जलाकर जिभ्या के दर्शन कराए जाते हैं। महाअष्टमी पर श्रद्धालु यहां मुंडन संस्कार, पूर्णाहुति और मनौती पूरी करने के उद्देश्य से आते हैं।
मंदिर प्रांगण के सामने स्थित तालाब में भगवान शिव की खड़ी मूर्ति, जिसे खंडेश्वर शिव मंदिर कहा जाता है, भी आस्था का बड़ा केंद्र है। भक्त शिवलिंग व मूर्ति के चरण दबाकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
विधि-विधान से पूजा
भोर से ही मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। मुख्य पुजारी उमेश नाथ योगी ने महंत चंद्रनाथ योगी के निर्देशन में अनुष्ठान संपन्न कराया। मां की प्रतिमा का दुग्धाभिषेक, श्रृंगार और विशेष हवन हुआ। 108 दीपों से की गई भव्य आरती में भक्तों ने माता से परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
कन्या पूजन और भंडारा
परंपरा अनुसार नौ कन्याओं और एक कुमार का पूजन कर उन्हें भोजन व उपहार प्रदान किए गए। इसके बाद विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
सीमांचल से उमड़े श्रद्धालु
बागेश्वरी मंदिर भारतीय सीमांचल रूपईडीहा से मात्र 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस कारण उत्तर प्रदेश के बहराइच, श्रावस्ती, गोंडा, बलरामपुर और लखनऊ सहित विभिन्न जनपदों से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचे।
महाअष्टमी पर नेपाल और भारत के श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने आस्था का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। हर वर्ष की तरह इस बार भी लाखों भक्तों ने दर्शन कर माता से आशीर्वाद प्राप्त किया। यह उत्सव नेपाल-भारत की सांस्कृतिक एकता को और प्रगाढ़ बनाने वाला सिद्ध हो रहा है।
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