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गंगा के आंचल पर कब्जा, तत्कालीन एसडीएम समेत छह गिरफ्तार
गुन्नौर। कोतवाली गुन्नौर क्षेत्र में कूटरचित तरीके से गंगा की 800 बीघा से अधिक भूमि राजस्व एवं चकबंदी विभाग के अधिकारियों के सहयोग से नौ अधिकारी व कर्मचारी समेत 58 अपात्रों के नाम दर्ज कर दी गई। इस मामले में हलका लेखपाल की तहरीर पर पुलिस ने तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार, लेखपाल, ग्राम पंचायत सदस्यों समेत 19 के खिलाफ धोखाधड़ी समेत संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस ने तत्कालीन एसडीएम, तत्कालीन चकबंदी अधिकारी व चकबंदी लेखपाल, तत्कालीन राजस्व निरीक्षक एवं पूर्व ग्राम प्रधान समेत आधा दर्जन लोगों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया।
जनपद के थारा रजपुरा क्षेत्र के गांव बसंतपुर निवासी स्वाती शर्मा ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि वह वर्तमान मे गांव भौना नंगला असदपुर तहसील गुन्नौर में हल्का लेखपाल के पद पर कार्यरत हैं। गैर आबाद गांव सुखैला हल्का क्षेत्र भौना नंगला के अंतर्गत आता है। 12 मार्च 2007 से अंतर्गत धारा 4क (2) उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम के प्रकाशन होने के बाद चकबंदी संक्रिया के अधीन रहते हुए जोत चकबंदी आकार पत्र 23 भाग 1 पर फर्जी ढंग से बिना किसी सक्षम अधिकारी की स्वीकृति के 58 व्यक्तियों के नाम फर्जी प्रविष्टियां तत्कालीन चकबंदी अधिकारी व कर्मचारियों द्वारा रेत के खाते की श्रेणी 5 (3) के तहत गंगा की भूमि के खाते की क्रमश: 56.3060 हैक्टेयर व 15.244 हैक्टेयर यानी कुल 71.5500 हैक्टेयर भूमि को श्रेणी 6 (4) के तहत दर्ज कर दी थी। जिसके संज्ञान में आने पर 09 दोषी अधिकारी व कर्मचारी व 58 अपात्र लाभार्थियों के विरुद्ध थाना गुन्नौर में मुकदमा अपराध संख्या 480/2018 में मुकदमा दर्ज कराया गया तथा तत्कालीन उच्चाधिकारियों के निर्देश पर चकबंदी अधिकारी द्वारा धारा 42क जो अधिनियम के तहत वाद दर्ज कर फर्जी प्रविष्टियां निरस्त की गईं। उक्त घटना के एक वर्ष के बाद पुन: 29 जून 2019 को उक्त गंगा के खाते की भूमि को तत्कालीन एसडीएम ओमवीर सिंह द्वारा 162 लाभार्थियों के पक्ष में स्वीकृत किया गया और 19 मार्च 2020 को चकबंदी विभाग द्वारा वही पर अंकित किया गया। 10 अगस्त 2020 को चकबंदी लेखपाल, चकबंदी कर्ता, सहायक चकबंदी अधिकारी द्वारा राजस्व निरीक्षक कार्यालय की रिपोर्ट प्रेषित की गई कि 162 बजाए 78 गाटों के 56.0820 हैक्टेयर क्षेत्र को कृषि आवंटन 140 लाभार्थियों के पक्ष में दर्ज किया जाना है। क्योंकि 21 गाटों का कुल रकबा 13.2180 हैक्टेयर डबल यानि अधिक हो गया है।
जिला शासकीय अधिवक्ता राजस्व जय भारद्वाज से विधिक परामर्श के बाद उक्त आवंटन 29 जून 2019 को चकबंदी अधिकारी को अमल दरामद करने के निर्देश दिए गए और 21 जनवरी 2022 को संशोधन तालिका पर सहायक चकबंदी अधिकारी के हस्ताक्षर के बाद जोत चकबंदी आकार पत्र भाग 1 के चक्र संख्या 758 पर गंगा श्रेणी की भूमियों का अमल दरामद किया गया। एक वर्ष पूर्व 2018 में उक्त गंगा की भूमि को फर्जी लाभार्थियों को आवंटित होने पर मुकदमा दर्ज होने तथा आवंटन निरस्त होने के बावजूद पुन: कूटरचित दस्तावेज तैयार कर आवंटन किया गया। जिसमें राजस्व संकिता 2006 की धारा 119 से 126 का उल्लंघन किया गया। जिसमें धारा 125 के तहत यदि सूची में शामिल व्यक्तियों की संख्या उन व्यक्तियों की संख्या से अधिक है जिन्हें भूमि व्यवस्थित की जानी है। तब यह सूची भूमि प्रबंधक समिति द्वारा बुलाई गई ग्राम सभा की खुली बैठक के समक्ष रखी जाएगी और आवंटन के लिए ऐसे व्यक्तियों का चयन किया। ये भी बताया गया कि हस्ताक्षर अंग्रेजी अपठित शेष किया जाएगा जो बैठक की सहमति से गुण दोष के आधार पर पर सर्वोत्तम पाए जाए और यदि सहमति नहीं बन पाती तो समिति लाटरी के द्वारा व्यक्तियों का चयन करेगी। जबकि 162 लाभार्थियों के स्वीकृत होने क बाद 140 लाभार्थियों को आवंटित की गई। जिसमें धारा 125 राजस्व संहिता का पालन नहीं किया गया। 31 मार्च 2023 को उक्त 17 अपात्र लाभार्थियों के आवंटन निरस्त करने के बाद भी 145 लाभार्थियों के नाम अभिलेखों में दर्ज हैं। जिनको कभी भी कब्जा नहीं दिलाया गया और न ही कभी किसी लाभार्थी द्वारा इसकी मांग की गई।
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